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अवचेतन मन कितना ताकतवर है? जानिए इसकी असली शक्ति

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अवचेतन मन कितना ताकतवर है? जानिए इसकी असली शक्ति

Subconscious Mind

हमारा दिमाग एक दिन में हज़ारों विचार पैदा करता है। कुछ विचार हम ध्यान से सुनते हैं- ये हमारा सचेतन मन (Conscious Mind) होता है। पर कुछ ऐसी चीज़ें भी हैं जो हम जाने-अनजाने करते रहते हैं- जैसे पुरानी बातें अचानक याद आ जाना, गाड़ी चलाना, गाना याद होना, या डर लगना।

ये सब अवचेतन मन (Subconscious Mind) के कारण होता है। वैज्ञानिक मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी का लगभग 90–95% हिस्सा अवचेतन मन द्वारा नियंत्रित होता है। यानी जिसे हम अपनी “मर्ज़ी” मानते हैं, वह भी कई बार पहले से जमा अनुभवों, भावनाओं और आदतों का परिणाम होता है।

यह मन हमारे सारे अनुभव, यादें, और भावनाएँ जमा करके रखता है, और हमारे बिना महसूस किए हमारी ज़िन्दगी के कई फैसलों और आदतों को नियंत्रित करता है। इस ब्लॉग में जानेंगे कि अवचेतन मन क्या होता है, उसकी असली शक्ति कितनी गहरी है, और कैसे हम इसे समझकर अपनी ज़िन्दगी को बेहतर बना सकते हैं।

अवचेतन मन (Subconscious Mind) क्या है?

कल्पना कीजिए कि आपका दिमाग एक विशाल कंप्यूटर है। आप जो अभी पढ़ रहे हैं, समझ रहे हैं और निर्णय ले रहे हैं, वह उसका मात्र 5% हिस्सा है यानी सचेतन भाग। बाकी 95% बैकग्राउंड सिस्टम, जिस पर आपका कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता, वह आपका अवचेतन मन है। यह मन चुपचाप काम करता है, पर बेहद गहराई में।

यह आपकी आदतें बनाता है, आपके डर तय करता है, आपकी सोच की दिशा तय करता है, आपकी पसंद-नापसंद चुनता है, आपकी भावनाएँ नियंत्रित करता है, आपकी स्मृति सँभालता है, आपके शरीर की कई प्रक्रियाओं को चलाता है, और सबसे खास- आपकी वास्तविकता पर असर डालता है। जब आप सो रहे होते हैं, तब भी यह लगातार काम करता रहता है।

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अवचेतन मन कितना ताकतवर है?

अवचेतन मन की ताकत समझने के लिए एक उदाहरण देखें- हमारा शरीर दिन भर लाखों जैविक क्रियाएँ करता रहता है, जैसे दिल का धड़कना, सांस लेना, पाचन क्रिया। ये सब सचेत मन के कब्जे में नहीं हैं, ये अवचेतन मन के नियंत्रण में होते हैं। इसका मतलब यह कि हमारा अवचेतन मन हमारे शरीर की अनगिनत ज़िम्मेदारियों को संभालता है बिना हमारे कुछ जानते हुए।

1. आपकी व्यवहारिक आदतें यहीं बनती हैं

आप रोज़ सुबह उठते हैं, टूथब्रश करते हैं, चाय/कॉफ़ी बनाते हैं, पानी पीते हैं, कभी सोचा कि यह सब आप बिना सोचे कैसे कर लेते हैं?
क्योंकि जब एक व्यवहार बार-बार दोहराया जाता है, तो वह अवचेतन मन में प्रोग्राम बन जाता है।

इस प्रोग्राम के चलते: आदतें अपने-आप चलती रहती हैं, आपको मानसिक ऊर्जा खर्च नहीं करनी पड़ती, दिमाग बाकी कामों पर ध्यान दे पाता है। इसलिए अच्छी आदत बनाना आसान नहीं होता क्योंकि आपको अवचेतन मन में पहले से बनी प्रोग्रामिंग बदलनी पड़ती है।

2. आपकी भावनाओं की जड़ भी अवचेतन मन है

कई बार ऐसा होता है कि बिना किसी कारण के चिंता होती है, या किसी बात से अचानक खुशी मिलती है- इसका मूल हमारी अवचेतन स्मृतियों में छिपा होता है। जैसे – किसी खास गंध से बचपन की यादें आना, किसी आवाज़ से डर लगना, किसी स्थान पर जाते ही मन भारी होना, किसी व्यक्ति को देखते ही अच्छा या बुरा महसूस होना

ये सभी अवचेतन भावनात्मक यादें (Emotional Memories) हैं। अक्सर केवल 10% भावनाएँ हमें सचेत रूप से समझ आती हैं, बाकी 90% अवचेतन मन में दबी रहती हैं।

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3. अवचेतन मन आपकी मान्यताओं को तय करता है

हम कैसे सोचते हैं, खुद को कैसे देखते हैं, जीवन को कैसे समझते हैं- यह सब अवचेतन मन की बनाई मान्यताओं पर आधारित होता है।जैसे: “मैं गलती नहीं कर सकता।” “मैं समझदार नहीं हूँ।” “पैसा कमाना मुश्किल है।” “मैं खुश रहने के लायक नहीं हूँ।” “लोग भरोसे लायक नहीं होते।”

ये मान्यताएँ हमने किसी किताब से नहीं पढ़ीं, ये अनुभवों, परिवार, समाज और बचपन की परवरिश से धीरे-धीरे अवचेतन मन में जमा हुईं।अच्छी बात यह है कि ये बदली जा सकती हैं और जब ये बदलती हैं, तो जीवन बदल जाता है।

4. आपकी सफलता का 80% हिस्सा अवचेतन पर निर्भर करता है

दुनिया की लगभग सभी सफलता की किताबें- Think and Grow Rich, The Secret, Atomic Habits- एक ही चीज़ पर ज़ोर देती हैं: आप वही बन जाते हैं, जैसा आप अपने अवचेतन मन में मान लेते हैं।

यदि अवचेतन मन मान ले कि: “मैं सफल हो सकता हूँ,” तो आप अवसर ढूँढने लगते हैं। यदि यह मान ले कि: मैं कमजोर हूँ, तो आप प्रयास ही नहीं करेंगे। यानी विचार → भावना → व्यवहार → परिणाम, सबकी जड़ अवचेतन मन है।

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5. शरीर का 90% स्वतः काम अवचेतन मन करता है

दिल धड़कता है, साँस चलती रहती है, पाचन होता रहता है, आँखें पलक झपकाती हैं, खून चलता रहता है, हार्मोन संतुलित होते हैं- ये सब अवचेतन मन की वजह से ही संभव है। यदि यह मन अपना संतुलन खो दे, तो शरीर भी बीमार पड़ने लगता है।

इसलिए कई वैज्ञानिक कहते हैं: “Healthy Mind = Healthy Body”

6. अवचेतन मन कल्पना और रचनात्मकता की जड़ है

जब आप नहाते समय, टहलते समय या सोने से पहले अचानक कोई शानदार आइडिया सोच लेते हैं- वह सचेत मन का नहीं, अवचेतन मन का काम होता है। अवचेतन मन: डेटा जोड़ता है, अनुभवों को मिलाता है, नई संभावनाएँ बनाता है, आपको समाधान देता है।

इसी वजह से कई महान वैज्ञानिक, कलाकार और लेखक अपनी कल्पना शक्ति के लिए ध्यान (Meditation) का सहारा लेते थे ताकि उनका अवचेतन मन खुलकर काम कर सके।

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अवचेतन मन कैसे बनता है?

हमारा अवचेतन मन मुख्य रूप से तीन जगहों से बनता है:

1. बचपन के अनुभव:

जीवन के पहले सात वर्षों में जो भी अनुभव मिलते हैं- डर, प्यार, दंड, उत्साह, असुरक्षा, संघर्ष- सब सीधे अवचेतन मन में सेट हो जाते हैं। क्योंकि उस समय दिमाग में Critical Thinking बहुत कम होती है। बचपन में जो बातें हम सुनते हैं, जो अनुभव हमें होते हैं, वे हमारे अवचेतन मन में विश्वास के रूप में स्थापित हो जाते हैं। ये विश्वास बाद में हमारी सोच और निर्णयों को आकार देते हैं।

2. लगातार दोहराव (Repetition)

जो चीज़ आप जितनी बार दोहराते हैं, वह उतनी गहराई से अवचेतन में उतरती है। अवचेतन मन हमारे जीवन के अनुभवों और आदतों से सीखता है। जब हम कुछ बार दोहराते हैं, तो वह हमरे अवचेतन में दर्ज हो जाता है। उदाहरण के लिए, किसी गीत को बार-बार सुनना या किसी भाषा का अभ्यास लगातार करना उसके माध्यम से अवचेतन मन उसे हमारी आदत बना देता है।

3. भावनात्मक घटनाएँ

जिन घटनाओं में भावनाएँ ज्यादा होती हैं जैसे डर, गुस्सा, शर्म, प्यार- वे सीधी अवचेतन में छप जाती हैं। इसी कारण: दिल टूटने की घटना भूलना मुश्किल होता है, बचपन के डर बड़े होकर भी पीछा करते हैं, किसी दुखद घटना की याद अचानक लौट आती है। हर तीव्र भावना से जुडी बातें हमारे अवचेतन में बस जाती हैं।

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अवचेतन मन बदलने के सबसे वैज्ञानिक तरीके

एक बड़ा सवाल है कि क्या अवचेतन मन बदला जा सकता है? हाँ! अवचेतन मन बदला जा सकता है, पर उसी तरह जैसे मिट्टी को बार-बार गीला कर के नया आकार दिया जाता है। यह बदलाव चार तरीकों से होता है:

1. सकारात्मक पुष्टि (Affirmations)

जो वाक्य हम रोज़ दोहराते हैं, वे अवचेतन में एक नया प्रोग्राम बना देते हैं। जैसे: “मैं सुरक्षित हूँ।” “मैं सक्षम हूँ।” “मैं अपनी जिंदगी संभाल सकता हूँ।” लेकिन ध्यान रहे, यह पुष्टि तभी असर करती है जब उनमें भावना जुड़ी हो। सिर्फ मुँह से कहने या सोचने से नहीं होगा।

2. कल्पना शक्ति (Visualization)

दिमाग वास्तविकता और कल्पना में फर्क नहीं कर पाता। जब आप किसी लक्ष्य की कल्पना करते हैं, अवचेतन उसे सच मानकर उसी दिशा में कदम बढ़ाने लगता है। यही कारण है कि एथलीट, स्टूडेंट और सफल लोग कल्पना शक्ति (Visualization) का उपयोग करते हैं।

3. ध्यान (Meditation)

ध्यान में सचेत मन शांत हो जाता है और अवचेतन मन खुलकर काम करने लगता है। ध्यान: नकारात्मक ऊर्जा हटाता है, दबी हुई भावनाओं को ठीक करता है, दिमाग को री-प्रोग्राम करता है

4. दोहराव (Repetition)

अवचेतन मन लगातार रिपीट होने वाली चीज़ों को सच मान लेता है, चाहे वे अच्छी हों या बुरी। इसीलिए: रोज़ एक नया व्यवहार दोहराने से आदत बनती है, रोज़ नकारात्मक सोच दोहराने से जीवन खराब होता जाता है।

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अवचेतन मन का उपयोग जीवन बेहतर बनाने में कैसे करें?

अगर आपने अपने अवचेतन मन को नहीं समझा, तो आप अपनी ही मन की बनाई प्रोग्रामिंग के गुलाम बन जाते हैं।
लेकिन अगर इसे समझ लिया तो आप अपना जीवन खुद बना सकते हैं। अवचेतन मन हमारी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है अगर हम इसे सही दिशा में प्रशिक्षित करें। यहाँ कुछ तरीके हैं:

1. नकारात्मक इनपुट सीमित करें

हम जो देखते-सुनते हैं, अवचेतन उसको सोख लेता है। रोजाना खुद से सकारात्मक बातें दोहराएं, जैसे “मैं सफल हूँ”, “मैं खुश हूँ”। इन्हें अवचेतन मन में दर्ज करने से आपका व्यवहार और सोच बदलती है। नकारात्मक लोगों से दूरी बनायें। शिकायतें कम सुनें, टीवी/सोशल मीडिया का चयन सोच-समझकर करें। दिन की शुरुआत सकारात्मक चीज़ों से करें।

2. रात को सोने से पहले दिमाग को निर्देश दें

सोने से पहले दिमाग सबसे ज्यादा सुझाव ग्रहण करता है। इसलिए रात में अपनी पॉजिटिव बातें दिमाग तक पहुचायें। जैसे: “कल का दिन शानदार होगा।” “मुझे सही रास्ता मिलेगा।” “मैं अपनी सेहत सुधार रहा हूँ।” इस तरह रोज़ 2–3 मिनट बातें करना भी बेहद असरदार हैं।

3. अपनी मान्यताएँ (Beliefs) बदलें

हमारे मन में कुछ मान्यताएं घर बना लेती हैं जिन्हें बदलना जरुरी है। अपने दिमाग से पूछें: “यह सोच मेरे किस पुराने अनुभव से आई?”  “यह सच है?” क्या मैं सही हूँ ? “इसका कोई नया बेहतर विकल्प है क्या ?” इस तरह विचार करने से धीरे-धीरे दिमाग पुराने विश्वासों को छोड़ना शुरू कर देता है।

4. खुद से बात करने का तरीका बदलें (Self-Talk)

हम दिन भर में लगभग 60,000 विचार सोचते हैं। यदि इनमें से ज्यादातर नकारात्मक हों, तो अवचेतन भी परेशान हो जाता है। इसलिए:गलती होने पर- “मैं बेवकूफ हूँ।” सोचने की जगह “मुझसे एक गलती हुई है, मैं इसे सुधार सकता हूँ।” इस तरह की सोच अपनाएं। अवचेतन तुरंत एक नया रास्ता बना देता है।

5. ध्यान और अभ्यास

ध्यान से मन शांत होता है और अवचेतन से जुड़ने में मदद मिलती है। इससे आप अपने मन के गुप्त हिस्से को बेहतर समझ सकते हैं। प्रतिदिन 15 मिनट से आधे घंटे का समय मैडिटेशन को दें। अगर कोई नई आदत या गुण अपनाना चाहते हैं तो उसे रोज़ाना दोहराएं। इससे वह आपके अवचेतन में बैठ जाएगा। अभ्यास बहुत प्रभावी होता है।

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निष्कर्ष (Conclusion)

आपका अवचेतन मन आपका सबसे बड़ा साथी है, यह आपको सफल भी बना सकता है और असफल भी- यह तय करता है कि आप इसे कैसे उपयोग करते हैं। आपका अवचेतन मन: आपकी सबसे गहरी इच्छाओं को सुनता है, आपके दर्द को संभालता है और आपकी क्षमताओं को जगाता है।

यह सतह के नीचे काम करने वाली एक शांत शक्ति है जो आपकी सोच, व्यवहार, आदतों और वास्तविकता को आकार देती है। इसलिए इसे नियंत्रित करना सीखिए… क्योंकि जब अवचेतन मन आपके पक्ष में काम करने लगे तो आपका जीवन आपकी कल्पना से कहीं अधिक शक्तिशाली हो जाता है।

अवचेतन मन हमारी ज़िन्दगी का सबसे ताकतवर हिस्सा है। अपनी सोच, आदत, और भावनाओं को पहचानकर, और सकारात्मक तरीकों से अवचेतन मन को प्रशिक्षित करके, हम अपनी ज़िन्दगी में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। यह शक्ति हमारे अंतर्मन की गहराई में मौजूद है, जिसे सही समझकर और सही दिशा में इस्तेमाल करके हम खुशहाल, सफल और मानसिक रूप से स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।

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