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व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

इस कैटेगरी में पढ़ें व्यवहारिक मनोविज्ञान से जुड़े लेख, जो आपके सोचने, समझने और प्रतिक्रिया देने के तरीके को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

Temporal Discounting
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

हम भविष्य को इतना हल्का क्यों लेते हैं? चौंकाने वाला सच

टेम्पोरल डिस्काउंटिंग एक सामान्य और स्वाभाविक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके कारण हम भविष्य को हल्के में लेते हैं। लेकिन इससे हमारे बड़े फैसले और जीवनशैली प्रभावित होती है। इसे समझ कर और अभ्यास से बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं।

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मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

ज़्यादा विकल्प = कम खुशी: मनोविज्ञान का चौंकाने वाला सच

विकल्प ज़िन्दगी का हिस्सा हैं, लेकिन ज़्यादा सोच-समझ कर विकल्प चुनना और उनमें खुश रहना भी बढ़िया कला है। मनोविज्ञान का यह सच हमें सिखाता है कि ज़्यादा विकल्प होना हमेशा खुशी नहीं देता, बल्कि कभी-कभी वह उलझन और तनाव का कारण बन जाता है।

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Emotional Blindspots
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

क्यों हम अपनी गलतियों को नहीं देख पाते? Emotional Blindspots

जानिए क्यों हम अपनी ही गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं और कैसे हमारे मन के इमोशनल ब्लाइंडस्पॉट्स हमारी सोच और रिश्तों को प्रभावित करते हैं। इस विस्तृत ब्लॉग में पाएँ प्रभावी टिप्स और रणनीतियाँ अपनी भावनाओं को समझने और आत्म-आश्वासन के साथ अपने दोषों को स्वीकारने के लिए।

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Approval Addiction
मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

हमें तारीफ की भूख क्यों लगती है? Approval Addiction का सच

हम सब अपने जीवन में कभी न कभी दूसरों की सराहना, तारीफ या अनुमोदन चाहते हैं। यह इच्छा यदि जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, तो यह ‘अप्रूवल एडिक्शन’ या मान्यता की भूख’ बन जाती है।

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Anger Energy management
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

गुस्से की इंस्टेंट ऊर्जा का सही उपयोग करें: जीवन बदल जायेगा

गुस्सा एक दरवाज़ा है- छोटा सा, लेकिन खतरनाक भी और चमत्कारी भी। यह आप पर निर्भर करता है कि आप उस दरवाज़े से विनाश में जाएंगे या विकास में। अगर आपने एक बार भी गुस्से की ऊर्जा को सही दिशा में लगा दिया तो सचमुच आपका जीवन बदल सकता है।

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Emotional Dependency
मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

इमोशनल डिपेंडेंसी या सच्चा प्यार? फर्क जानिए और खुद को बचाइए

इमोशनल डिपेंडेंसी और सच्चे प्यार में फर्क समझना अपने आत्म-सम्मान, मानसिक स्वास्थय और संपूर्ण जीवन की गुणवत्ता के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है।

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vyast rahne ka manojigyan productivity trap
मानसिक स्वास्थ्य – तनाव, चिंता और आत्म-संतुलन के उपाय, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला, शरीर और मन का विज्ञानं

व्यस्त रहना सफलता नहीं है- दिमाग किसे उपलब्धि समझता है?

आधुनिक जीवन शैली में “हमेशा व्यस्त रहना” एक प्रतिष्ठा बन गई है। लोग अपनी व्यस्तता को सफलता और आत्म-सम्मान से जोड़ने लगे हैं। जबकि व्यस्त रहना और उत्पादक होना दो अलग बातें हैं। हमारे दिमाग को वास्तविक उत्पादकता के लिए “ब्रेक,” “विश्राम,” और “संतुलन” की उतनी ही जरूरत है जितनी काम की।

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मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

Comfort Zone का मनोविज्ञान: क्यों दिमाग बदलाव से डरता है

बदलाव एक प्रक्रिया है जिसका स्वागत सही मानसिकता, योजना, और समर्थन के साथ किया जा सकता है। इसे भय के स्थान पर विकास का अवसर समझकर अपनाना ज्यादा सकारात्मक और प्रभावी होता है।

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आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

Mindset का जादू: सोच बदलो- कामयाबी हासिल करो

आपका Mindset सिर्फ़ सोच नहीं है, यह आपके दिमाग़ की संरचना और जीवन की दिशा दोनों तय करता है। यानी, अगर आप सोच बदलते हैं, तो सच में आपका दिमाग बदलने लगता है और वही आपकी ज़िंदगी बदल देता है।

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मनोवैज्ञानिक फैक्ट्स, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

पुरुष व महिला के दिमाग में क्या अंतर है? सरल भाषा में समझें

महिला और पुरुष दोनों के दिमाग़ में कुछ विशेषताएँ होती हैं, जिनका सीधा सम्बन्ध उनकी जैविक बनावट, हार्मोन, और समाजिक अनुभवों से है। इसका असर उनके सोचने, महसूस करने, और काम करने के तौर-तरीकों पर पड़ता है।

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