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व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

इस कैटेगरी में पढ़ें व्यवहारिक मनोविज्ञान से जुड़े लेख, जो आपके सोचने, समझने और प्रतिक्रिया देने के तरीके को बेहतर बनाने में मदद करेंगे।

Self-Sabotage
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

Self-Sabotage: हम खुद को सफल होने से क्यों रोकते हैं?

Self-Sabotage को हराना कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं, एक अभ्यास है। हर दिन जब आप खुद को थोड़ा बेहतर समझते हैं, और थोड़ा आगे बढ़ते हैं तभी आप खुद को रोकने की बजाय को उठाना शुरू करते हैं। अपने ही दुश्मन मत बनो — अपने सबसे अच्छे साथी बनो।

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Entitlement Syndrome
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

मुझे सब मिलना ही चाहिए: युवाओं में बढ़ती हकदारी की भावना

“मुझे सब कुछ मिलना चाहिए” — यह सोच जितनी आकर्षक लगती है, उतनी ही खतरनाक भी है। यह व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है। यदि हम एक संतुलित और सफल जीवन चाहते हैं, तो हमें अधिकार की नहीं, जिम्मेदारी की भावना को अपनाना होगा।

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मोटापा : भारत की अगली महामारी
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला, स्वास्थ्य और पोषण

मोटापा: भारत की अगली महामारी तो नहीं है ?

भारत में मोटापा तेजी से एक नई महामारी के रूप में उभर रहा है। जानिए इसके पीछे के कारण, डराने वाले आंकड़े, और इससे निपटने के लिए जरूरी कदम – इस तथ्यपूर्ण और चेतावनी भरे ब्लॉग में।

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Multiple selves theory
मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, मानसिक स्वास्थ्य – तनाव, चिंता और आत्म-संतुलन के उपाय, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

कभी आपने सोचा? हर आदमी में होते हैं, दस-बीस आदमी

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे अंदर सच में कितने “आप” होते हैं? हमारा स्वयं (सेल्फ) एक जैसा और स्थिर नहीं होता। अलग-अलग परिस्थितियों, लोगों और भूमिकाओं में हमारा व्यवहार, विचार और भावनाएँ बदल जाती हैं। यही सेल्फ-प्लुरलिज़्म, सेल्फ-कॉम्प्लेक्सिटी और सेल्फ-कॉन्सेप्ट डिफरेंशिएशन की अवधारणाएँ हैं—जो हमें बताती हैं कि हमारे अंदर कई स्व होते हैं, जो हर माहौल में अलग-अलग रूप में दिखाई देते हैं। आइए, जानते हैं कि हमारे अंदर कितने “आप” हैं और ये कैसे हमारे व्यक्तित्व को बनाते हैं।

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अकेले पड़ते बुजुर्ग
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पैसे की दौड़ में खोए रिश्ते: ओल्डएज होम्स की संख्या बढ़ी

भागदौड़ भरी जिंदगी और पैसे की होड़ ने हमारे पारिवारिक रिश्तों को गहराई से प्रभावित किया है। ओल्ड एज होम्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो समाज में बदलते मूल्यों और जनरेशन गैप की एक बड़ी तस्वीर पेश करती है।  

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man padhna seekho
मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला, शरीर और मन का विज्ञानं

मन पढ़ना सीखिए: सामने बैठे व्यक्ति को पहचानने की 20 टिप्स

किसी के मन को पढ़ना कोई जादू नहीं, बल्कि एक कला है जो सूक्ष्म संकेतों, हावभाव, बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार को ध्यान से देखने पर आधारित है। यह कला आपके निजी और प्रोफेशनल जीवन दोनों में बेहद मददगार हो सकती है।

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Akele rahne ka fashion
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, मानसिक स्वास्थ्य – तनाव, चिंता और आत्म-संतुलन के उपाय, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

अकेले रहने का फैशन: क्या शादी का दौर खत्म हो रहा है?

अकेले रहना या “सिंगल रहना” अब एक फैशन और स्वतंत्रता की निशानी बन गया है। यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा ट्रेंड है जो बेहद चिंताजनक है। शादी का “दौर” खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका अंदाज़ और उद्देश्य बदलना चाहिए।

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सोच बदलो, जिंदगी बदल जाएगी
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

सोच बदलो, जिंदगी बदल जाएगी: पॉजिटिव माइंडसेट कैसे बनाएं

सोच बदलो तो जिंदगी कैसे बदल जाएगी ! इस ब्लॉग में हम जानेंगें पॉजिटिव माइंडसेट के बारे में, और हम अपनी सोच को आसान और प्रैक्टिकल तरीकों से कैसे बदल सकते हैं इसका मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करेंगे।

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मनिफेस्टेशन तकनीक
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

सोच से सफलता तक- मैनिफेस्टेशन का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण

मेनिफेस्टेशन एक मोटिव और सकारात्मक सोचने का तरीका है, जो आपके आत्मविश्वास, मोटिवेशन और लक्ष्य प्राप्ति में मदद कर सकता है। लेकिन इसे जादू समझने की बजाय, इसे मेहनत, योजना और व्यवहारिक कदमों के साथ जोड़ना चाहिए। तभी आप अपने सपनों को सच कर सकते हैं।

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भावनात्मक शोषण
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, चिंता और तनाव प्रबंधन – मानसिक शांति के मनोवैज्ञानिक तरीके, मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

जीवन में इन 8 लोगों को न दें दूसरा मौका-मनोवैज्ञानिक कारण

जीवन में दूसरा मौका देना एक सुनहरा अवसर होता है, लेकिन हर किसी को यह मौका नहीं मिलना चाहिए। जो लोग बार-बार आपके भरोसे को तोड़ते हैं, आपके साथ मुश्किल समय में खड़े नहीं होते, जो केवल लेना जानते हैं, चिर आलोचक होते हैं, या केवल अपने फायदे के लिए आपके साथ जुड़ते हैं, उन्हें दूसरा मौका न देना ही बेहतर होता है।

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