G-5PXC3VN3LQ

आत्म-विकास और आदतें

दैनिक जीवन में सकारात्मक आदतें विकसित करने और सोच के पैटर्न को समझने से जुड़े व्यावहारिक लेख।

मौन उदासी
आत्म-विकास और आदतें, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जागरूकता

मौन उदासी: जब आप थक चुके होते हैं लेकिन बोलते नहीं

मौन उदासी उस छुपी हुई मानसिक स्थिति का नाम है, जिसमें व्यक्ति खुद भी नहीं समझ पाता कि वह अंदर ही अंदर टूट रहा है। एक चुपचाप बढ़ता मानसिक संघर्ष जो शब्दों में नहीं आता, लेकिन धीरे-धीरे इंसान को भीतर से खोखला कर देता है। इस लेख में इसके कारण और बचाव के तरीके जानें।

, , , , , , , ,
Anger management
आत्म-विकास और आदतें, व्यवहारिक मनोविज्ञान

क्या आप भी जल्दी गुस्सा हो जाते हैं?जानिए इसका मनोविज्ञान

गुस्सा एक स्वाभाविक भावना है, लेकिन जब यह बार-बार या अत्यधिक आने लगे, तो यह मानसिक, शारीरिक और सामाजिक समस्याओं का कारण बन सकता है। गुस्से को समझना, स्वीकारना और सही तरीके से व्यक्त करना ही संतुलित जीवन की कुंजी है।

, , , , , , , ,
आत्म-विकास और आदतें, मनोवैज्ञानिक तथ्य और व्यावहारिक सुझाव, व्यवहारिक मनोविज्ञान

Couples Therapy: रिश्तों को बचाने का साइंटिफिक तरीका

Couples Therapy एक इलाज नहीं, बल्कि एक अभ्यास (process) है – जहां कपल्स अपने पुराने जख्मों को समझते हैं, व्यवहारिक आदतों को सुधारते हैं और एक नए, स्वस्थ रिश्ते की नींव रखते हैं।

, , , , , , , , , ,
Self-Sabotage
आत्म-विकास और आदतें, व्यवहारिक मनोविज्ञान

Self-Sabotage: हम खुद को सफल होने से क्यों रोकते हैं?

Self-Sabotage को हराना कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं, एक अभ्यास है। हर दिन जब आप खुद को थोड़ा बेहतर समझते हैं, और थोड़ा आगे बढ़ते हैं तभी आप खुद को रोकने की बजाय को उठाना शुरू करते हैं। अपने ही दुश्मन मत बनो — अपने सबसे अच्छे साथी बनो।

, , , , , , , , , , ,
Entitlement Syndrome
आत्म-विकास और आदतें, मनोवैज्ञानिक तथ्य और व्यावहारिक सुझाव, व्यवहारिक मनोविज्ञान

मुझे सब मिलना ही चाहिए: युवाओं में बढ़ती हकदारी की भावना

“मुझे सब कुछ मिलना चाहिए” — यह सोच जितनी आकर्षक लगती है, उतनी ही खतरनाक भी है। यह व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है। यदि हम एक संतुलित और सफल जीवन चाहते हैं, तो हमें अधिकार की नहीं, जिम्मेदारी की भावना को अपनाना होगा।

, , , , , ,
मोटापा : भारत की अगली महामारी
आत्म-विकास और आदतें, व्यवहारिक मनोविज्ञान

मोटापा: भारत की अगली महामारी तो नहीं है ?

भारत में मोटापा तेजी से एक नई महामारी के रूप में उभर रहा है। जानिए इसके पीछे के कारण, डराने वाले आंकड़े, और इससे निपटने के लिए जरूरी कदम – इस तथ्यपूर्ण और चेतावनी भरे ब्लॉग में।

, , , , , , , , ,
social rejection = physical pain
आत्म-विकास और आदतें, मनोवैज्ञानिक तथ्य और व्यावहारिक सुझाव, शरीर और मन का संबंध

दिल टूटे या पैर, दिमाग दोनों को एक जैसा महसूस करता है

क्या दिल टूटने का दर्द वाकई असली होता है? न्यूरोसाइंस कहता है – हां! आपका दिमाग ब्रेकअप या भावनात्मक चोट को उसी तरह महसूस करता है जैसे किसी फिजिकल इंजरी को। जानिए इसका मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक कारण।

, , , , , , , , ,
ब्रेन मैपिंग
आत्म-विकास और आदतें, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जागरूकता

खुद को पहचानने में ब्रेन मैपिंग की क्या भूमिका है

खुद को पहचानने में ब्रेन मैपिंग की क्या भूमिका है नाम: अर्पिता शर्मा, उम्र: 32 वर्ष, पेशा: कॉर्पोरेट मैनेजर (MNC),

, , , , , , ,
Akele rahne ka fashion
आत्म-विकास और आदतें, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जागरूकता, व्यवहारिक मनोविज्ञान

अकेले रहने का फैशन: क्या शादी का दौर खत्म हो रहा है?

अकेले रहना या “सिंगल रहना” अब एक फैशन और स्वतंत्रता की निशानी बन गया है। यह सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर देखा जा रहा ट्रेंड है जो बेहद चिंताजनक है। शादी का “दौर” खत्म नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका अंदाज़ और उद्देश्य बदलना चाहिए।

, , , , , , , , ,
सोच बदलो, जिंदगी बदल जाएगी
आत्म-विकास और आदतें, व्यवहारिक मनोविज्ञान

सोच बदलो, जिंदगी बदल जाएगी: पॉजिटिव माइंडसेट कैसे बनाएं

सोच बदलो तो जिंदगी कैसे बदल जाएगी ! इस ब्लॉग में हम जानेंगें पॉजिटिव माइंडसेट के बारे में, और हम अपनी सोच को आसान और प्रैक्टिकल तरीकों से कैसे बदल सकते हैं इसका मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करेंगे।

, , , , , , , , ,
Scroll to Top