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आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम

इस कैटेगरी में पढ़ें आत्म-विकास, आदत सुधार, और मोटिवेशन से जुड़े लेख जो आपको एक बेहतर इंसान बनने में मदद करते हैं।

Srikrishn ke siddhant
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम

श्रीकृष्ण के जीवन से सीखने योग्य 20 महत्वपूर्ण सिद्धांत

भगवान कृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि कठिनाइयाँ, रिश्ते, निर्णय, रणनीति और आनंद — सभी जीवन के जरूरी हिस्से हैं। अगर हम धैर्य, बुद्धि और प्रेम से जीवन जीना सीख लें, तो हमारा जीवन भी सफल और सार्थक हो सकता है।

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Cognitive Biases
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

Cognitive Biases: क्या हमारा दिमाग हमें धोखा देता है?

हमारा दिमाग एक अद्भुत यंत्र है, लेकिन ये भी सच है कि यह हमेशा सही नहीं सोचता। Biases हमारे अनुभवों, विचारों और निर्णयों को प्रभावित करते हैं — और अगर हम इन्हें नहीं पहचानते, तो ये हमारी ज़िंदगी को सीमित कर सकते हैं।

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swar vigyan
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, शरीर और मन का विज्ञानं

सांसों से मानसिक शांति: स्वर विज्ञान की चमत्कारी शक्ति

स्वर विज्ञान कोई रहस्यमयी अवधारणा नहीं, बल्कि हमारे शरीर और मस्तिष्क के बीच ऊर्जा-संचार का विज्ञान है। यदि सही तरीके से इसे समझा और अपनाया जाए, तो यह तनाव-रहित, एकाग्र और जागरूक जीवन जीने में सहायता कर सकता है।

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Emotional Baggage
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

Emotional Baggage: क्या हम अपने अतीत को ढोते रहते हैं ?

हममें से अधिकांश लोग अनजाने में ही अपने अतीत को ढोते हैं और फिर उसी बोझ से थककर, अपने आज के रिश्तों को भी खंडित कर बैठते हैं। पर यह ज़रूरी है कि हम जानें — हमारा अतीत हमें परिभाषित नहीं करता, हमारी वर्तमान समझ और स्वीकृति करती है।

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types of brain
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, मनोवैज्ञानिक फैक्ट्स, मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, शरीर और मन का विज्ञानं

आप जानते हैं- दिमाग कितने प्रकार के होते हैं?

हमारा दिमाग शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। हर इंसान के सोचने का तरीका अनोखा होता है। अपने दिमाग के प्रकार को पहचानना आत्म-विकास की दिशा में पहला क़दम है।

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मौन उदासी
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, मानसिक स्वास्थ्य – तनाव, चिंता और आत्म-संतुलन के उपाय

मौन उदासी: जब आप थक चुके होते हैं लेकिन बोलते नहीं

मौन उदासी उस छुपी हुई मानसिक स्थिति का नाम है, जिसमें व्यक्ति खुद भी नहीं समझ पाता कि वह अंदर ही अंदर टूट रहा है। एक चुपचाप बढ़ता मानसिक संघर्ष जो शब्दों में नहीं आता, लेकिन धीरे-धीरे इंसान को भीतर से खोखला कर देता है। इस लेख में इसके कारण और बचाव के तरीके जानें।

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Anger management
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

क्या आप भी जल्दी गुस्सा हो जाते हैं?जानिए इसका मनोविज्ञान

गुस्सा एक स्वाभाविक भावना है, लेकिन जब यह बार-बार या अत्यधिक आने लगे, तो यह मानसिक, शारीरिक और सामाजिक समस्याओं का कारण बन सकता है। गुस्से को समझना, स्वीकारना और सही तरीके से व्यक्त करना ही संतुलित जीवन की कुंजी है।

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आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

Couples Therapy: रिश्तों को बचाने का साइंटिफिक तरीका

Couples Therapy एक इलाज नहीं, बल्कि एक अभ्यास (process) है – जहां कपल्स अपने पुराने जख्मों को समझते हैं, व्यवहारिक आदतों को सुधारते हैं और एक नए, स्वस्थ रिश्ते की नींव रखते हैं।

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Self-Sabotage
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

Self-Sabotage: हम खुद को सफल होने से क्यों रोकते हैं?

Self-Sabotage को हराना कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं, एक अभ्यास है। हर दिन जब आप खुद को थोड़ा बेहतर समझते हैं, और थोड़ा आगे बढ़ते हैं तभी आप खुद को रोकने की बजाय को उठाना शुरू करते हैं। अपने ही दुश्मन मत बनो — अपने सबसे अच्छे साथी बनो।

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Entitlement Syndrome
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

मुझे सब मिलना ही चाहिए: युवाओं में बढ़ती हकदारी की भावना

“मुझे सब कुछ मिलना चाहिए” — यह सोच जितनी आकर्षक लगती है, उतनी ही खतरनाक भी है। यह व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है। यदि हम एक संतुलित और सफल जीवन चाहते हैं, तो हमें अधिकार की नहीं, जिम्मेदारी की भावना को अपनाना होगा।

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