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मोटिवेशन लंबा क्यों नहीं टिकता? 7 उपाय जो सच में काम करें

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मोटिवेशन लंबा क्यों नहीं टिकता? 7 उपाय जो सच में काम करें

motivation hindiजीवन में कई बार ऐसा होता है जब हम कोई बड़ा लक्ष्य तय करते हैं – जैसे जिम जाना शुरू करना, किताब लिखना या नया बिजनेस शुरू करना। शुरुआत में जोश भरा होता है, मोटिवेशन आसमान छूता है।

लेकिन कुछ दिनों या हफ्तों बाद ही वह जोश फीका पड़ जाता है। मोटिवेशन लंबे समय तक नहीं टिकता, यह एक आम समस्या है। क्यों होता है ऐसा? और सबसे बड़ा सवाल- इसका समाधान क्या है?

इस ब्लॉग में हम इसी पर गहराई से चर्चा करेंगे। मनोविज्ञान, न्यूरोसाइंस और व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर बताएंगे कि मोटिवेशन की कमी क्यों आती है और इसे स्थायी रूप से कैसे बनाए रखें।

अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो हर नया साल रेजोल्यूशन लेते हैं लेकिन मार्च तक भूल जाते हैं, तो यह आर्टिकल आपके लिए है। चलिए, पहले समझते हैं समस्या की जड़।

मोटिवेशन क्यों लंबे समय तक नहीं टिकता?

प्रेरणा कोई जादुई गोली नहीं है जो हमेशा काम करे। यह मस्तिष्क की एक रासायनिक प्रक्रिया है। डोपामाइन नामक हार्मोन इसके पीछे मुख्य भूमिका निभाता है। जब हम कोई नया काम शुरू करते हैं, तो डोपामाइन का स्तर बढ़ता है, जो हमें उत्साहित महसूस कराता है। लेकिन यह ‘नवीनता का रोमांच’ केवल शुरुआत में ही रहता है।

मोटिवेशन को हम अक्सर कोई स्थायी शक्ति मान लेते हैं, जबकि वास्तव में यह एक भावनात्मक अवस्था है। जैसे खुशी, गुस्सा या उत्साह- यह आती है और चली जाती है। समस्या तब शुरू होती है जब हम सोचते हैं कि: “जब मन करेगा, तब काम करेंगे।”

असलियत यह है कि: मोटिवेशन स्थायी नहीं होता, भावना पर आधारित चीज़ें भरोसेमंद नहीं होतीं और ज़िंदगी रोज़ भावना के हिसाब से नहीं चल सकती- इसलिए मोटिवेशन पर पूरी ज़िंदगी टिका देना खुद को धोखा देना है।

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मनोविज्ञान के अनुसार मुख्य कारण:

मोटिवेशन खत्म होने के कुछ मनोवैज्ञानिक कारण इस प्रकार हैं –

1. मोटिवेशन भावनाओं पर टिका होता है

आज आप उत्साहित हैं, कल थके हुए, परसों निराश। भावनाएँ बदलती रहती हैं, लेकिन ज़िम्मेदारियाँ नहीं। जब काम भावना से जुड़ा होता है, तो भावना बदलते ही काम रुक जाता है।

2. हम “मूड बनने” का इंतज़ार करते रहते हैं

बहुत से लोग कहते हैं: “आज मूड नहीं है” “मन नहीं कर रहा” “कल से शुरू करेंगे”, लेकिन सच्चाई यह है: मूड काम करने से बनता है, काम मूड से नहीं। जो लोग इंतज़ार करते हैं, वे पीछे रह जाते हैं।

3. लक्ष्य बहुत बड़े और अस्पष्ट होते हैं

“सफल होना है” “फिट होना है” “कुछ बड़ा करना है”, ये लक्ष्य प्रेरक लगते हैं, लेकिन दिमाग को स्पष्ट दिशा नहीं देते। दिमाग अस्पष्टता से डरता है, इसलिए काम टाल देता है।

4. हम तुरंत परिणाम चाहते हैं

आज की दुनिया में सब कुछ जल्दी चाहिए: जल्दी फिटनेस, जल्दी पैसा, जल्दी पहचान- लेकिन जब मेहनत के तुरंत नतीजे नहीं दिखते, तो मोटिवेशन गिर जाता है। तात्कालिक पुरस्कार की कमी: जिम में पसीना बहाने से तुरंत फायदा नहीं दिखता, जबकि चिप्स खाने से तुरंत सुख मिलता है।

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5. वातावरण की ताकत को कम आंकते हैं

आप कितने भी मोटिवेटेड क्यों न हों- अगर मोबाइल हाथ में है, सोशल मीडिया खुला है, चारों ओर डिस्ट्रैक्शन है तो मोटिवेशन हार जाएगा।
इच्छाशक्ति सीमित होती है, वातावरण शक्तिशाली। इच्छाशक्ति की सीमा: रिसर्च के मुताबिक, विलपावर एक मांसपेशी की तरह है, यह जल्दी थक जाती है।

6. हम अपनी पहचान नहीं बदलते

अगर अंदर से आप खुद को यही कहते हैं: “मैं आलसी हूँ” “मुझसे रोज़ नहीं होता” “मैं डिसिप्लिन वाला इंसान नहीं हूँ”, तो मोटिवेशन बार-बार टूटेगा, क्योंकि आप उसी पहचान में लौट आएंगे।

7. सिस्टम नहीं बनाते, सिर्फ जोश पर चलते हैं

जोश भावनात्मक होता है, सिस्टम व्यवहारिक। जोश खत्म होता है, सिस्टम चलता रहता है। अगर हम ‘दूसरों की नजर में अच्छे दिखने’ के लिए काम करें, तो वह जल्दी खत्म हो जाता है। एक अध्ययन बताता है कि 92% लोग नए साल के रेजोल्यूशन फेल हो जाते हैं। कारण? केवल मोटिवेशन पर निर्भरता।

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मोटिवेशन को बनाये रखने के 7 कारगर उपाय

हमेशा प्रेरित रहने के लिए हमें कुछ उपायों पर काम करना जरुरी है –

1. गोल्डिलॉक्स नियम अपनाएँ

प्रेरणा खत्म होने का एक बहुत बड़ा कारण यह है कि हम या तो खुद पर बहुत ज़्यादा दबाव डाल देते हैं, या फिर खुद को कोई चुनौती ही नहीं देते। यहीं पर गोल्डिलॉक्स नियम (Goldilocks Rule) काम करता है। इंसान तब सबसे ज़्यादा प्रेरित रहता है, जब काम न बहुत आसान हो और न बहुत कठिन, बल्कि उसकी क्षमता से थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो।

बहुत आसान काम बोरियत पैदा करता है, जबकि बहुत कठिन काम डर और टालमटोल बढ़ाता है। इन दोनों स्थितियों में मोटिवेशन धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। जब हम अपनी क्षमता से थोड़ा ऊपर का काम चुनते हैं, तो दिमाग उसमें जुड़ जाता है। आत्मविश्वास बढ़ता है और काम बोझ नहीं बल्कि चुनौती लगता है। यही वह स्तर है जहाँ मोटिवेशन अपने आप बना रहता है। हर दिन खुद से पूछिए- “आज मैं कल से 5–10% बेहतर क्या कर सकता हूँ?” यही संतुलन लंबे समय तक मोटिवेशन को ज़िंदा रखता है।

2. मोटिवेशन नहीं, सिस्टम बनायें

सिर्फ मोटिवेशन पर भरोसा करना खतरनाक हैजो लोग सिर्फ मोटिवेशन पर चलते हैं वो बार-बार शुरुआत करते हैं लेकिन काम पूरा नहीं करते, खुद से निराश रहते हैं। वे सोचते हैं कि समस्या उनमें है, जबकि समस्या उनका तरीका है। सिस्टम का मतलब है- तय समय, तय जगह, तय प्रक्रिया उदाहरण: रोज़ सुबह 6 से 6:30 पढ़ना, रोज़ शाम 10 मिनट टहलनाम।

इसके बाद मन हो या न हो- सिस्टम चलता है। मोटिवेशन आए तो बोनस, न आए तो भी काम पूरा। ज़्यादातर लोग काम को भावना से जोड़ देते हैं- अच्छा लगा तो किया, बुरा लगा तो टाल दिया लेकिन पेशेवर लोग ऐसा नहीं करते। वे कहते हैं- “8 बजे काम करना है, चाहे मैं कैसा भी महसूस कर रहा हूँ।” जब आप समय को कंट्रोल दे देते हैं, तो भावना धीरे-धीरे पीछे हट जाती है।

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3. अपने आसपास की चीजें बदलें

आपका घर या ऑफिस आपको काम करने के लिए प्रेरित कर सकता है। बस छोटे बदलाव करें ताकि काम अपने आप याद आए। आप कितने भी समझदार क्यों न हों, गलत वातावरण में आप भी हार सकते हैं।

  • जिम जाना है तो जूते और बैग दरवाजे पर रखें। जैसे ही बाहर निकलें, मन करेगा जाना।
  • फोन पर गेम या सोशल मीडिया को लिमिट करें।
  • काम की टेबल पर सिर्फ जरूरी चीजें रखें- पानी की बोतल, नोटबुक।
  • याद रखिए: इच्छाशक्ति सीमित होती है, लेकिन वातावरण बहुत ताकतवर।

4. काम इतना छोटा बनायें कि बहाना न बचे

मोटिवेशन अक्सर इसलिए मरता है क्योंकि काम बहुत बड़ा लगता है। अगर आप सोचते हैं- “आज 2 घंटे पढ़ना है” तो दिमाग थक जाता है लेकिन अगर आप कहें-“आज सिर्फ 5 मिनट” तो दिमाग मना नहीं करता।

अगर मन कहे कि “आज नहीं हो पायेगा” तो खुद से कहिए- “सिर्फ 5 मिनट”, यह ट्रिक इसलिए काम करती है क्योंकि शुरुआत सबसे कठिन होती है, शुरू करने के बाद रुकना आसान नहीं होता, अक्सर 5 मिनट, 30 मिनट बन जाते हैं। खुद से झूठे वादे करना आत्मविश्वास तोड़ता है। छोटे वादे निभाना आत्मसम्मान बढ़ाता है।

5. नई आदत को पुरानी आदत से जोड़ें

अपने मन की बात कागज पर उतारें। इससे नकारात्मक विचार साफ होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। नई चीज सीखने की बजाय, जो पहले से करते हैं उसके साथ नयी आदतों को जोड़ें। इससे आप उन्हें भूलेंगे नहीं। जैसे –

  • चाय पीने के ठीक बाद 2 मिनट स्ट्रेचिंग करें।
  • खाना खाने के बाद 5 मिनट किताब पढ़ना, या टहलना ।
  • सोने से पहले डायरी लिखना, कल के 3 काम लिखना।

6. प्रगति नोट करें और खुशी मनाएं

अपने किये गए काम का हिसाब रखें और छोटी सफलता पर इनाम दें। इससे जोश बना रहता है। कैलेंडर पर क्रॉस लगाएं: हर दिन काम किया तो तारीख पर चिन्ह लगाएं। लकीर न टूटे तो आपको यह मजा देगा। साप्ताहिक गिनती करें: रविवार को देखें- ‘इस हफ्ते मैंने 5 दिन किया, शाबाश!’ खुद को हर सफलता पर इनाम दें: 7 दिन चेन पूरी तो पसंदीदा मिठाई खाएं (स्वास्थ्य वाला)। ऐसा करने से मोटिवेशन बना रहता है।

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7. गिरने को असफलता नहीं, प्रक्रिया मानें

बहुत लोग इसलिए रुक जाते हैं क्योंकि वो सोचते हैं “आज छूट गया” “आज नहीं हो पाया” “मैं फिर फेल हो गया”, लेकिन सच्चाई यह है कि गिरना कमजोरी नहीं, वहीं रुक जाना कमजोरी है। जो लोग निरंतर आगे बढ़ते हैं- वे चूकते हैं, गिरते है लेकिन खुद को दोष नहीं देते, अगले दिन फिर शुरू करते हैं। निरंतरता का मतलब परफेक्ट होना नहीं, बल्कि बार-बार लौट आना है। आगे बढ़ते रहने और निरंतरता से प्रेरणा बनी रहती है।

निष्कर्ष:

मोटिवेशन एक चिंगारी है। लेकिन आग जलाए रखने के लिए लकड़ी चाहिए। वह लकड़ी है- आदत, अनुशासन, सिस्टम और खुद से ईमानदारी। जब आप यह समझ जाते हैं कि “काम पहले, मन बाद में” तब मोटिवेशन की कमी आपकी राह नहीं रोक सकती।

आप हर दिन मोटिवेटेड महसूस नहीं करेंगे। और इसकी ज़रूरत भी नहीं है। ज़िंदगी जोश से नहीं, रोज़ के छोटे फैसलों से बदलती है। मोटिवेशन लंबे समय तक नहीं टिकता, यह सच है। लेकिन यहाँ दिए गए 7 आसान उपाय अपनाकर आप खुद को बदल सकते हैं। सोचिए:

  • 21 दिन बाद ये काम अपने आप होने लगेंगे।
  • 66 दिन बाद ये आपकी जीवनशैली बन जाएंगी।
  • 1 साल बाद आप वही इंसान होंगे जिसका सपना देखते थे!

सफल लोग मोटिवेटेड नहीं रहते – वे बस काम करते रहते हैं। हर सफल इंसान ने यही रास्ता अपनाया। आप भी कर सकते हैं! आपका सबसे बड़ा मोटिवेशन खत्म करने वाला क्या है? (थकान/परिवार/फोन?) इससे बाकियों को भी मदद मिलेगी।

लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि आपके दोस्त/रिश्तेदार भी अपनी जिंदगी बदल सकें। 

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