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मल्टीटास्किंग का झूठ: दिमाग एक साथ कई काम नहीं कर सकता

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मल्टीटास्किंग का झूठ: दिमाग एक साथ कई काम नहीं कर सकता

क्या आपने कभी यह महसूस किया कि आप टीवी देखते हुए फोन चलाते हैं, ऑफिस का मेल लिखते हैं और साथ-साथ किसी से बात भी कर लेते हैं? हमें लगता जरूर है कि दिमाग कई काम एक साथ कर रहा है…

लेकिन सच यह है कि दिमाग मल्टीटास्क नहीं करता। वह सिर्फ बहुत तेजी से कामों के बीच स्विच करता है और इसी को हम ‘मल्टीटास्किंग’ समझ लेते हैं।

वैज्ञानिक अनुसंधान बताते हैं कि इंसानी दिमाग मूलतः मल्टीटास्किंग के लिए डिज़ाइन नहीं हुआ है और जब हम एक साथ कई काम करते हैं तो हमारा ध्यान एक काम पर नहीं रहता, जिससे फोकस कम हो जाता है और काम की गुणवत्ता गिरती है।

इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि दिमाग असल में कैसे काम करता है, मल्टीटास्किंग हमारे लिए नुकसानदायक क्यों है, और कैसे हम अपनी फोकस क्षमता को वापस पा सकते हैं।

हमारे दिमाग को मल्टीटास्किंग क्यों पसंद नहीं?

दिमाग की क्षमता और मल्टीटास्किंग का सच समझना आज की तेजी से बदलती जीवनशैली में बहुत महत्वपूर्ण है। दिमाग मूलतः एक  समय में एक ही काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार जब हम मल्टीटास्किंग करते हैं, तो हमारा दिमाग बहुत परेशान हो जाता है क्योंकि इस समय वह तेजी से एक काम से दूसरे काम पर ध्यान केंद्रित करता रहता है। इस प्रक्रिया को “स्विचिंग” कहा जाता है, जिससे दिमाग की ऊर्जा जल्दी खत्म हो जाती है, और काम की गुणवत्ता और कुशलता दोनों घटने लगती हैं।

दिमाग की ऊर्जा और IQ पर प्रभाव

न्यूरोसाइंटिस्ट डैनियल के अनुसंधान से पता चलता है कि मल्टीटास्किंग से दिमाग अस्थायी रूप से अपनी IQ की कुछ पॉइंट खो देता है। अगर हम लगातार एक समय में कई काम करने की कोशिश करते हैं, तो दिमाग को अधिक ग्लूकोज चाहिए होता है जो जल्दी खत्म हो जाता है, जिससे दिमाग थक जाता है और सामान्य स्थिति से कम प्रभावी हो जाता है।

कॉग्निटिव लोड और मानसिक तनाव

लगातार मल्टीटास्किंग से दिमाग पर मानसिक बोझ यानी कॉग्निटिव लोड बढ़ता है। इससे तनाव और थकान दोनों अधिक हो जाते हैं। तनाव बढ़ने पर शरीर में कॉर्टिसोल नामक हार्मोन सक्रिय होता है, जो दिमाग की नई जानकारी को याद रखने की क्षमता को कम कर देता है। इस वजह से याददाश्त कमजोर हो जाती है और सीखने की दक्षता घटने लगती है।

ध्यान और फोकस की कमी

बहुत से काम एक साथ करने में दिमाग बार-बार कामों के बीच ध्यान बदलता रहता है, जिससे फोकस कमजोर पड़ जाता है। यह न केवल काम के दौरान ध्यान भटकने का कारण बनता है बल्कि लंबी अवधि की स्मृति को भी प्रभावित करता है। परिणामस्वरूप, व्यक्ति काम या पढ़ाई के दौरान अक्सर भूलने की समस्या का सामना करता है।

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मल्टीटास्किंग के तीन बड़े नुकसान

कई काम एक साथ करना, दिखने में “स्मार्ट” और “फास्ट” लगता है, लेकिन दिमाग के स्तर पर यह हमारी क्षमता को कमजोर करता है। इससे होने वाले ये तीन नुकसान सबसे गंभीर हैं:

1. प्रोडक्टिविटी लगभग 40% तक गिर जाती है

यानी जितना हम सोचते हैं कि ‘ज्यादा कर रहे हैं’, उतना ही कम कर पाते हैं, मल्टीटास्किंग में हमारा दिमाग असल में एक काम से दूसरे काम पर बार-बार स्विच करता है। हर बार जब आपका ध्यान बदलता है:

  • दिमाग को पुराने काम से बाहर आने में कुछ सेकंड लगते हैं
  • नए काम को समझने में भी कुछ सेकंड लगते हैं
  • दिमाग को “रिदम” पकड़ने में 20–30 सेकंड तक लग सकते हैं
  • ये छोटे-छोटे गैप मिलकर आपकी स्पीड को बहुत कम कर देते हैं।

उदाहरण: अगर आप ईमेल लिख रहे हों और बीच में नोटिफिकेशन चेक कर लें—आप वापस आते ही फ्लो भूल जाते हैं, लाइन दुबारा पढ़ते हैं और कुछ सेकंड रिस्टार्ट में चले जाते हैं। यह प्रक्रिया पूरे दिन में सैकड़ों बार होती है। इसी कारण प्रोडक्टिविटी औसतन 40% तक गिर जाती है।

2. गलतियाँ कई गुना बढ़ जाती हैं

क्योंकि दिमाग गहराई से प्रोसेस नहीं कर पाता- मल्टीटास्किंग में दिमाग का ध्यान खंडित (fragmented) हो जाता है। जब ध्यान गहरा नहीं होता तो जानकारी अधूरी दर्ज होती है, भाषा प्रोसेसिंग गड़बड़ा जाती है, निर्णय क्षमता कमजोर होती है, याददाश्त पर भी असर पड़ता है इससे गलतियाँ बढ़ने लगती हैं। जैसे : टाइपो और ग्रामर मिस्टेक्स, बातें भूल जाना, गलत निर्णय लेना, incomplete या गलत उत्तर देना

ऐसा इसलिए होता है क्योंकि दिमाग को फोकस मोड से बाहर आने में समय लगता है, और हर बार बाहर आने पर वह जानकारी को कम गहराई से पकड़ता है। जितना ज्यादा आप स्विच करते हैं, उतनी ज्यादा गलतियाँ होती हैं। इसलिए महत्वपूर्ण काम- जैसे लिखना, पढ़ना, गणना करना, निर्णय लेना आदि मल्टीटास्किंग में कभी सही से नहीं हो पाते।

3. दिमाग जल्दी थकता है और तनाव बढ़ता है

मल्टीटास्किंग दिमाग को Hyper-alert mode में फँसा देती है- मल्टीटास्किंग में दिमाग के दो हिस्से लगातार एक्टिव रहते हैं—

-Prefrontal Cortex (फोकस और निर्णय)
-Anterior Cingulate Cortex (टास्क स्विचिंग)

दोनों पर एक साथ दबाव पड़ता है, जिससे: मानसिक थकान जल्दी हो जाती है, चिड़चिड़ाहट बढ़ती है, दिमाग “बिखरा” हुआ महसूस करता है, छोटी-छोटी बातें भी भारी लगने लगती हैं, तनाव बढ़ता है क्योंकि दिमाग आराम नहीं कर पाता। सबसे बड़ी बात कि लंबे समय तक मल्टीटास्किंग करते रहने से दिमाग की ध्यान देने की क्षमता कम होने लगती है।

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मल्टीटास्किंग का झूठ

बच्चों और युवाओं पर असर

मल्टीटास्किंग बच्चों और युवाओं के लिए विशेष रूप से हानिकारक हो सकता है क्योंकि उनके दिमाग की सीखने और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता अभी विकसित हो रही होती है। पढ़ाई करते समय कई काम एक साथ करने से उनकी लर्निंग क्षमता कम होती है, जो उनके शैक्षणिक प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।

इसलिए दिमाग की क्षमता बचाने के लिए सुझाव है कि एक बार में एक काम पर पूरा ध्यान दिया जाए। यह आदत दिमाग की ऊर्जा की बचत करती है, याददाश्त को मजबूत बनाती है, तनाव कम करती है और काम की उत्पादकता बढ़ाती है।

मल्टीटास्किंग से बचने के 8 बेहद असरदार सुझाव

1. हर दिन सिर्फ 3 “Most Important Tasks” तय करें:

बहुत लंबी टू-डू लिस्ट दिमाग को बिखरा देती है। जब आप सिर्फ 3 महत्वपूर्ण काम तय करते हैं तो दिमाग स्वचालित रूप से उसी दिशा में केंद्रित रहता है। कम लिस्ट = ज्यादा फोकस

2. Pomodoro तकनीक अपनाएँ (25 मिनट फोकस + 5 मिनट ब्रेक):

25 मिनट तक सिर्फ एक ही काम, ना फोन, ना ईमेल, ना मैसेज। ब्रेक में आराम। ये तरीका दिमाग को Single-tasking मोड में ट्रेन करता है।

3. सभी नोटिफिकेशन बंद करें (या कम से कम Mute रखें):

नोटिफिकेशन = ध्यान तोड़ने का हथियार। हर बार मोबाइल चमकने पर दिमाग तुरंत एक काम से दूसरे काम पर स्विच हो जाता है। सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन बंद करें, सिर्फ कॉल ऑन रखें।

4. गहन कार्यों के लिए “No-Distraction Zone” बनाएं:

हर दिन 1–2 घंटे ऐसे हों जब: फोन दूर हो, टैब बंद हो, कोई व्यवधान न हो, यह दिमाग की सबसे शक्तिशाली एकाग्रता को सक्रिय करता है।

5. एक बार में एक ही विंडो/टैब खोलें:

एक साथ: यूट्यूब, जीमेल, व्हाट्सप्प, फेसबुक, इंस्टाग्राम या अन्य टैब ना खोलें। ज्यादा पेज खुले रखना दिमाग को “टास्क स्विचिंग मोड” में डाल देता है। काम करते समय सिर्फ 1–2 टैब रखें।

6. सोशल मीडिया के लिए Fixed Time सेट करें:

बार-बार फ़ोन चेक करने की आदत दिमाग को फ्रैगमेंटेड रखती है।
इसके लिए दो टाइम तय करें: सुबह आधा घंटा और शाम को आधा घंटा। बाकी समय सोशल मीडिया से पूरी दूरी।

7. एक ही तरह के काम एक साथ करें (Task Batching):

अपने कामों का एक बैच बनायें – सारे फोन कॉल एक साथ, सारे ईमेल एक साथ, सारी लिखाई एक समय पर, सारी प्लानिंग एक बार में। इससे दिमाग काम के प्रवाह में रहने लगता है और बार-बार स्विच नहीं करता।

8. नोटबुक या डिजिटल नोट्स रखें:

जब दिमाग में कई काम घूमते रहते हैं तो वह मल्टीटास्क मोड में चला जाता है। इसलिए जो भी काम याद आए, उसे लिख लें। इससे दिमाग शांत हो जाता है और फोकस वापस आता है।

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निष्कर्ष

इसलिए मल्टीटास्किंग को एक गुण या स्मार्टनेस की निशानी न मानकर इसे एक दिमागी कमजोरी समझना चाहिए। बेहतर होगा कि हम एक समय में एक काम पर पूरा ध्यान दें, जिससे न केवल काम की गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि मानसिक तनाव भी कम होगा और दिमाग स्वस्थ रहेगा। यह आदत हमारी प्रोडक्टिविटी और याददाश्त दोनों के लिए लाभकारी होती है।

यह जानकारी कई वैज्ञानिक रिपोर्टों और शोधों पर आधारित है जो बताते हैं कि दिमाग एक साथ कई काम नहीं करता बल्कि लगातार एक से दूसरे पर स्विच करता है, जिससे दिमाग पर अत्यधिक दबाव पड़ता है और काम की कुशलता कम होती है। Single-tasking कोई कमजोरी नहीं- यह दिमाग का स्वाभाविक और सबसे शक्तिशाली तरीका है।

अगर आप अपनी लाइफ, काम और मानसिक शांति को बेहतर बनाना चाहते हैं तो Multitasking से बाहर निकलें,और Single-tasking की ताकत को महसूस करें।

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https://www.iaee.com/2023/01/10/what-you-must-know-about-the-dangers-of-multitasking/

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