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सुनने–देखने से सिर्फ नॉलेज बढ़ती है, स्किल क्यों नहीं बनती?

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सुनने–देखने से सिर्फ नॉलेज बढ़ती है, स्किल क्यों नहीं बनती?

Passive Learning Trap

हम सब आज ऐसी दुनिया में रहते हैं जहाँ सीखना पहले से कहीं आसान हो गया है- YouTube वीडियो, पॉडकास्ट, ऑनलाइन कोर्स, शॉर्ट्स, ब्लॉग… जानकारी हर जगह है। आप रोजाना मोटिवेशनल वीडियो भी देखते हैं, पॉडकास्ट भी सुनते हैं, स्किल-बिल्डिंग कंटेंट भी देखते हैं लेकिन एक समस्या फिर भी बनी रहती है:

ज्ञान तो बढ़ता है, पर स्किल वही की वही! इसे कहते हैं “Passive Learning Trap”- एक ऐसा भ्रम जिसमें लगता है कि हम बहुत सीख रहे हैं, जबकि असल में हम कोई कौशल नहीं बना पा रहे।

ऐसा लग सकता है कि जितना ज्यादा हम पढ़ेंगे या सुनेंगे, हमारी समझ उतनी ही बेहतर होगी और हमारे कौशल (skills) में भी उतनी ही वृद्धि होगी। लेकिन वास्तविकता यह है कि केवल सुनने और देखने से ज्ञान जरूर बढ़ता है, लेकिन स्किल मजबूत नहीं बनती। इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि ऐसा क्यों होता है, यह जाल कैसा होता है, इसका दुष्प्रभाव और इससे निकलने के उपाय।

Passive Learning जाल क्या है?

निष्क्रिय सीखना (Passive Learning) का अर्थ है सीखने की प्रक्रिया जिसमें व्यक्ति केवल जानकारी को ग्रहण करता है, पर उसमें सक्रिय भागीदारी नहीं करता। उदाहरण के लिए, केवल वीडियो देखकर, लेक्चर सुनकर, किताब पढ़कर लगता है “मैं इस विषय का जानकार हो गया” लेकिन उस ज्ञान को व्यवहार में लाने या अभ्यास करने की कोशिश नहीं करता है।

Passive Learning Trap तब बनता है जब कोई व्यक्ति इस सहज ज्ञान की स्थिति में फंसा रहता है कि “मैंने तो सब सीख लिया” जबकि असल में उसने जो सुना या पढ़ा, उसे अपनाकर व्यवहारिक कौशल विकसित नहीं किए। Passive Learning की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें दिमाग आराम में रहता है। कोई वास्तविक प्रयास नहीं होता, कोई गलती नहीं होती, कोई चुनौती महसूस नहीं होती—बस सूचना बहती रहती है और आप उसे ग्रहण करते जाते हैं।

लेकिन…याद रखें – कौशल वहीं बनता है जहाँ दिमाग मेहनत करे।

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सिर्फ सुनने–देखने से ज्ञान क्यों बढ़ जाता है?

यह बिलकुल सही है कि सुनने और देखने से ज्ञान में वृद्धि होती है क्योंकि Knowledge सिर में जमा होने वाली चीज है। नॉलेज की प्रकृति ही निष्क्रिय है। अवधारणा समझाना, थ्योरी बताना, आईडिया देना, तथ्य साझा करना- ये सब सूचना हैं, जिन्हें दिमाग बिना किसी मेहनत के स्टोर कर सकता है। दिमाग हमारी सुनने और देखने की बातों को रिकॉर्ड करता है। इसका कारण है:

संवेदनात्मक ग्रहणशक्ति (Sensory Reception): हमारी आँखें और कान बाहर की दुनिया से जानकारी हासिल करते हैं। ज्ञान का सबसे पहला चरण यह होता है।
स्मृति में जानकारी का अवशोषण: जब हम किसी विषय को सुनते या देखते हैं, तो उसका आधार हमारा शॉर्ट-टर्म मेमोरी या लॉन्ग-टर्म मेमोरी में जाकर जमा होता है।
सिद्धांत और जानकारी की समझ: passive learning के जरिए हम तथ्यों, कॉन्सेप्ट्स और सामान्य जानकारी को अच्छे से समझ पाते हैं।इसलिए, passive learning ज्ञान का पहला और जरुरी चरण होता है।

फिर स्किल क्यों नहीं बनती?

ज्ञान प्राप्ति केवल सुनने–देखने से होती है, स्किल बनाना उससे अलग प्रक्रिया है। स्किल वह क्षमता है जिससे हम अपने ज्ञान को व्यवहार में लागू कर पाते हैं। निम्न कारणों से passive learning से स्किल नहीं बढ़ती:

1. सक्रिय अभ्यास (Active Practice) का अभाव

कौशल तभी बनता है जब ज्ञान को लागू किया जाता है। उदाहरण के लिए यदि आपने फोटोग्राफी के बारे में बहुत पढ़ा, लेकिन कैमरे को हाथ में लेकर तस्वीरें नहीं लीं, तकनीक समझ में आने के बावजूद आप फोटोग्राफर नहीं बन पाएंगे। स्किल बनाने के लिए चार चीज़ें ज़रूरी हैं: कोशिश करना, गलती करना, गलती सुधारना, बार-बार दोहराना। इनके बिना कौशल विकसित नहीं होता और यह चारों चीजें करने से मिलती हैं, देखने-सुनने में नहीं।

2. मस्तिष्क का सहयोग न देना

दिमाग हमेशा आसान रास्ता चुनता है ये दिमाग का स्वभाव है- वो जिधर मेहनत कम हो, उधर भागेगा। सुनना–देखना आसान है, इसमें कोई डर, गलती, शर्म, आलोचना नहीं होती। लेकिन स्किल में यह सब होता है, इसलिए दिमाग आपको स्किलड बनने से रोकता है। जब हम केवल सुनते-देखते हैं, तो हमारा दिमाग ज्यादातर जानकारी को बिना गहन विश्लेषण, सवाल या आलोचना के ग्रहण करता है। स्किल बनाने के लिए संवाद, प्रश्न-उत्तर, समस्या हल करना जरूरी है; जिसे सक्रिय मानसिक सहभागिता कहते हैं।

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3. अनुभूति और अनुभव की कमी

स्किल सिर्फ अनुभव से बनती है, ज्ञान से नहीं- आपने देखा होगा: हर रसोइया रेसिपी तो जानता है, पर अच्छा वही बनाता है जो रोज़ बनाता है। हर व्यक्ति बोलने के टिप्स जानता है, पर आत्मविश्वास वही बनाता है जो बोलता है। क्योंकि अनुभव ही स्किल का ईंधन है। कौशल सीखने के लिए अनुभव अनिवार्य हैं। अनुभवहीन व्यक्ति केवल सूचनात्मक स्तर पर ज्ञान रखता है पर व्यावहारिक चुनौतियों को समझ नहीं पाता।

4. स्किल एक क्रिया, जानकारी एक विचार

जानकारी = बात समझ आ गई, स्किल = बात करके दिखा दी। इन दोनों में जमीन–आसमान का अंतर है। जैसे: तैरने का वीडियो देखकर आपकी जान नहीं बचेगी, खाना बनाने की रेसिपी देखकर रोटी नहीं फूलेगी, व्यायाम देखने से शरीर नहीं बनेगा। स्किल शरीर + दिमाग + भावनाओं की संयुक्त क्रिया है। ये सिर्फ बैठकर सीखने से नहीं होती।

5. मोटर नर्व फंक्शन का जुड़ाव नहीं होना

कई स्किल्स जिसमें हाथ-पैर या शरीर के अन्य अंगों की मूवमेंट शामिल हो, जैसे संगीत वादन, खेल, ड्राइविंग आदि, पढ़ाई या सुनने से नहीं बल्कि लगातार अभ्यास से आती हैं। जब आप कोई काम बार-बार करते हैं तो शरीर और दिमाग के बीच एक रास्ता बनता है- इसे कहते हैं कौशल मार्ग (Skill Pathway)। यह मार्ग देखने–सुनने से नहीं बनता। यह मार्ग बनता है करने से। इसीलिए- लिखने की स्किल हाथ के अभ्यास से आती है, खेलने की स्किल शरीर के अभ्यास से आती है।

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Passive Learning जाल के दुष्प्रभाव

निष्क्रिय सीखने के जाल में फंसे रहना शैक्षिक और व्यावसायिक दोनों ही स्तरों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है:

सतही ज्ञान: गहरा ज्ञान न बन पाने की वजह से समस्या समाधान में कमी आती है।
आत्मविश्वास में कमी: व्यवहार में असफलताओं के कारण आत्मविश्वास प्रभावित होता है।
प्रगति रुकना: नई स्किल न बनने के कारण कैरियर में उन्नति मुश्किल हो जाती है।
समय की बर्बादी: बहुत पढ़ाई/वीडिओ पर भी कम परिणाम मिलते हैं।
मोटिवेशन में गिरावट: बार-बार प्रयास विफल होने से सीखने की रूचि कम हो जाती है।

Passive Learning Trap

वास्तविक जीवन के उदाहरण

कुकिंग वीडियो : 10 वीडियो देखकर भी पहली बार रोटी गोल नहीं बनेगी। क्योंकि गोल रोटी skill है, ज्ञान केवल तरीका है।

अंग्रेजी बोलना : 50 reels देखकर grammar समझ आ जायेगा। पर बोलना तब आएगा जब आप बोलेंगे, गलती करेंगे, सुधारेंगे।

कसरत और फिटनेस : Exercises के वीडियो देखकर आपको तरीका समझ में आ सकता है, पर सही समस्या आप को तब लगेगी जब आप खुद करेंगे।

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Passive Learning जाल से कैसे बाहर आएं?

इस जाल से निकलना और सक्रिय रूप से सीखना बेहद जरूरी है। इसके कुछ प्रभावी उपाय हैं:

Step 1: एक चीज़ सीखें, तुरंत लागू करें

Active Learning अपनाएं- सिर्फ सुनने-देखने तक सीमित न रहें। सीखने की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएं: नोट्स बनाएं, खुद से प्रश्न पूछें। जो पढ़ा या सुना उसे किसी और को समझाएं। वीडियो देखकर ही एक छोटा सा स्टेप करके दिखाएँ- कुछ भी हो: लिखना, बोलना, अभ्यास करना, निर्णय लेना।

Step 2: Learning Ratio बदलें- 20% देखें, 80% करें

कौशल तभी मजबूत होते हैं जब उन्हें बार-बार दोहराया और अभ्यास किया जाए। जैसे: रोजाना स्किल के छोटे-छोटे टास्क करें। वास्तविक जीवन में उस ज्ञान को आजमाएं। फीडबैक लेकर सुधार करें।आप जितना अधिक करेंगे, उतनी तेजी से skill बनेगी। इसलिए देखना कम और अभ्यास ज्यादा होना चाहिए।

Step 3: Micro Practice करें

सीखते समय छोटे-छोटे गोल बनाएं- Learning Goals निर्धारित करें और उन्हें पाने की दिशा में काम करें। इससे प्रगति का आभास लगेगा और उत्साह बना रहेगा। छोटे स्टेप्स में सीखें: 5 मिनट अभ्यास, प्रतिदिन 10 मिनट दोहराना।

Step 4: गलतियों से दोस्ती करें

ज्ञान को स्थायी बनाने के लिए देखने, सुनने के साथ खुद जाकर अनुभव करना, लिखना, बोलना, महसूस करना जरुरी होता है। इसमें गलतियां होना निश्चित है। लेकिन याद रखें – गलती = Growth, गलती = Skill-building, गलती = Progress। चूँकि Passive learning में गलती नहीं होती, इसलिए उसमें skill नहीं बनती।

Step 5: Feedback लें

सबसे जरुरी कदम है अपने स्किल पर दूसरों का फीडबैक लेना। चाहे दोस्तों से, किसी मेंटोर से, या खुद से, Feedback सीखने की असली रीढ़ है। आपको किस सुधार की जरुरत है या क्या कमी है ये जानकर ही स्किल को इम्प्रूव किया जा सकता है।

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निष्कर्ष

सिर्फ सुनने और देखने से ज्ञान ज़रूर बढ़ता है, लेकिन स्किल बनने के लिए सक्रिय भागीदारी, निरंतर अभ्यास, अनुभव और ध्यान देना जरूरी है। Passive Learning Trap में फंसना असल में सीखने की एक बड़ी बाधा है। इसे समझकर हम अपने सीखने के तरीके को प्रभावी बना सकते हैं और सिर्फ नॉलेज ही नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल स्किल्स भी विकसित कर सकते हैं जो जीवन और करियर दोनों में सहायक होंगे।

ज्ञान प्राप्ति और कौशल निर्माण दोनों की प्रक्रिया समझकर और सक्रिय बनकर, कोई भी व्यक्ति अपने लक्ष्य को अधिक कुशलता से प्राप्त कर सकता है। सुनना–देखना आसान है, इसलिए इसे सीखना समझ लेना प्राकृतिक है। लेकिन… Knowledge दिमाग में बनती है। Skill शरीर, दिमाग और भावनाओं के साथ बनती है। यही कारण है: सिर्फ सुनने–देखने से ज्ञान बढ़ता है, लेकिन स्किल कभी नहीं।

अगर आप निष्क्रिय सीखने (Passive Learning) के जाल से निकलकर सक्रिय सीखने (Active Learning) की शुरुआत कर दें, तो कुछ ही महीनों में आपकी काम करने की क्षमता, आत्मविश्वास, बातचीत की कुशलता, लिखने की क्षमता और करियर- सबमें गहरा बदलाव दिखाई देने लगता है।

यदि आप इस दिशा में आगे बढ़ना चाहते है तो हमें जरूर लिखें।  इस लेख को अन्य लोगों तक पहुचायें। 

https://focuskeeper.co/glossary/what-is-passive-learning

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