जो कहते हैं ‘मैं ठीक हूँ’, वही अंदर से टूटे होते हैं
‘मैं ठीक हूँ’ कई बार सच नहीं, बल्कि भावनाओं को दबाने का तरीका होता है। जानिए क्यों चुप रहने वाले लोग सबसे ज़्यादा मानसिक थकान झेलते हैं।
G-5PXC3VN3LQ
Skip to content‘मैं ठीक हूँ’ कई बार सच नहीं, बल्कि भावनाओं को दबाने का तरीका होता है। जानिए क्यों चुप रहने वाले लोग सबसे ज़्यादा मानसिक थकान झेलते हैं।
जब हमारे इमोशंस शरीर को हाईजैक कर लेते हैं, तो दिमाग, हार्मोन और नर्वस सिस्टम तुरंत अलग तरह से प्रतिक्रिया देने लगते हैं। इस ब्लॉग में जानिए कैसे गुस्सा, डर, दुख, तनाव और खुशी हमारे शरीर की धड़कन, सांस, पाचन, मांसपेशियों और फैसलों को प्रभावित करते हैं और हम इसे कैसे समझें और कंट्रोल करें।
हम सब अपने जीवन में कभी न कभी दूसरों की सराहना, तारीफ या अनुमोदन चाहते हैं। यह इच्छा यदि जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, तो यह ‘अप्रूवल एडिक्शन’ या मान्यता की भूख’ बन जाती है।
गुस्सा एक दरवाज़ा है- छोटा सा, लेकिन खतरनाक भी और चमत्कारी भी। यह आप पर निर्भर करता है कि आप उस दरवाज़े से विनाश में जाएंगे या विकास में। अगर आपने एक बार भी गुस्से की ऊर्जा को सही दिशा में लगा दिया तो सचमुच आपका जीवन बदल सकता है।
आपका Mindset सिर्फ़ सोच नहीं है, यह आपके दिमाग़ की संरचना और जीवन की दिशा दोनों तय करता है। यानी, अगर आप सोच बदलते हैं, तो सच में आपका दिमाग बदलने लगता है और वही आपकी ज़िंदगी बदल देता है।
हम toxic या जहरीले लोगों को इसलिए याद रखते हैं क्योंकि हमारा दिमाग “ख़तरे को न भूलने” के लिए डिज़ाइन हुआ है। लेकिन इंसान होने का मतलब सिर्फ survive करना नहीं बल्कि उसे ठीक करना भी है। Negativity Bias हमें चेतावनी देता है, पर उसी में फँसे रहना ज़रूरी नहीं।
Revenge Bedtime Procrastination आधुनिक जीवन की एक मौन पुकार है- “मुझे थोड़ी आज़ादी चाहिए।” लेकिन अगर हम उस आज़ादी को नींद और सेहत की क़ीमत पर खरीदते हैं, तो ये बदला धीरे-धीरे स्वयं का विनाश या स्वयं की हानि बन जाता है।
इंसान को वो चीज़ सबसे ज़्यादा चाहिए होती है, जो उसे नहीं मिलती। और यही भावना किसी के ignore करने पर आकर्षण में बदल जाती है। यह केवल एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा मनोवैज्ञानिक कारण होता है। जानिए इसके कारण और बचाव के तरीके।
माइक्रोएक्सप्रेशन्स चेहरे की उन “नन्हीं लेकिन महत्वपूर्ण” हरकतों का नाम हैं, जो अक्सर हमारी सच-मुच की भावनाओं को बयाँ करती हैं, चाहे हम उन्हें छिपाना चाहें। अतः यह चेहरे की भाषा का एक गुप्त भाग है, जो शब्दों के पीछे छिपे असली अर्थ को उजागर कर सकता है।
नवरात्र उपवास “शरीर से लेकर मन” की सफाई, आत्मनियंत्रण, और भावनाओं के शोधन का सशक्त अवसर है। उपवास को सही दृष्टिकोण, मनोवैज्ञानिक तैयारी, और आध्यात्मिक भाव के साथ अपनाया जाए—तो यह भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर कल्याण कर सकता है।