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Human behaviour

आत्मनिर्भरता vs ट्रॉमा
मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

“मुझे किसी की ज़रूरत नहीं”- आत्मनिर्भरता है या ट्रॉमा?

‘मुझे किसी की ज़रूरत नहीं’ सुनने में आत्मनिर्भरता लगता है, लेकिन हर बार यह ताक़त नहीं होती। कई बार यह वाक्य पुराने ट्रॉमा, डर और आत्मरक्षा से जन्म लेता है। यह लेख उसी अंतर को समझने की कोशिश है।

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हेडॉनिक एडाप्टेशन
व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला, शरीर और मन का विज्ञानं

जिस चीज को हम पा लेते हैं, उससे मोहभंग क्यों हो जाता है?

जिस रिश्ते, सपने या लक्ष्य को पाने के लिए हम तड़पते हैं, उसे हासिल करने के बाद वही साधारण क्यों लगने लगता है? क्या हम कृतघ्न हैं या हमारा दिमाग ही ऐसा बना है? यह लेख मोहभंग के पीछे छिपी मनोवैज्ञानिक सच्चाई को उजागर करता है।

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Less Speaking People
व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

कम बोलने वाले लोगों के व्यक्तित्व के 10 मनोवैज्ञानिक सच

कम बोलने वाले लोगों के ये मनोवैज्ञानिक गुण दर्शाते हैं कि खामोशी कमजोरी नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली व्यक्तित्व का प्रतीक है। इन्हें समझकर हम अपनी सोच बदल सकते हैं और खुद में इन गुणों को अपनाकर जीवन को समृद्ध बना सकते हैं।

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Cognitive Miser Theory
मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, शरीर और मन का विज्ञानं

दिमाग हमेशा शॉर्टकट क्यों खोजता है– Cognitive Miser Theory

Cognitive Miser Theory यह नहीं कहती कि हम मूर्ख हैं बल्कि यह कहती है कि दिमाग ऊर्जा बचाकर समझदारी से काम करता है। लेकिन हमें चाहिए कि: जहाँ जरूरी हो, गहराई से सोचें, जल्दी निर्णय से बचें, सोचने की क्षमता को सक्रिय रखें। तभी हम बेहतर निर्णय ले पाएँगे और जीवन को अधिक समझदारी से जी पाएँगे।

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Temporal Discounting
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

हम भविष्य को इतना हल्का क्यों लेते हैं? चौंकाने वाला सच

टेम्पोरल डिस्काउंटिंग एक सामान्य और स्वाभाविक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिसके कारण हम भविष्य को हल्के में लेते हैं। लेकिन इससे हमारे बड़े फैसले और जीवनशैली प्रभावित होती है। इसे समझ कर और अभ्यास से बेहतर निर्णय लिए जा सकते हैं।

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Approval Addiction
मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

हमें तारीफ की भूख क्यों लगती है? Approval Addiction का सच

हम सब अपने जीवन में कभी न कभी दूसरों की सराहना, तारीफ या अनुमोदन चाहते हैं। यह इच्छा यदि जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए, तो यह ‘अप्रूवल एडिक्शन’ या मान्यता की भूख’ बन जाती है।

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Srikrishn ke siddhant
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम

श्रीकृष्ण के जीवन से सीखने योग्य 20 महत्वपूर्ण सिद्धांत

भगवान कृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि कठिनाइयाँ, रिश्ते, निर्णय, रणनीति और आनंद — सभी जीवन के जरूरी हिस्से हैं। अगर हम धैर्य, बुद्धि और प्रेम से जीवन जीना सीख लें, तो हमारा जीवन भी सफल और सार्थक हो सकता है।

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Emotional Baggage
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला

Emotional Baggage: क्या हम अपने अतीत को ढोते रहते हैं ?

हममें से अधिकांश लोग अनजाने में ही अपने अतीत को ढोते हैं और फिर उसी बोझ से थककर, अपने आज के रिश्तों को भी खंडित कर बैठते हैं। पर यह ज़रूरी है कि हम जानें — हमारा अतीत हमें परिभाषित नहीं करता, हमारी वर्तमान समझ और स्वीकृति करती है।

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man padhna seekho
मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए, व्यवहारिक मनोविज्ञान – सोच और व्यवहार को समझने की कला, शरीर और मन का विज्ञानं

मन पढ़ना सीखिए: सामने बैठे व्यक्ति को पहचानने की 20 टिप्स

किसी के मन को पढ़ना कोई जादू नहीं, बल्कि एक कला है जो सूक्ष्म संकेतों, हावभाव, बॉडी लैंग्वेज और व्यवहार को ध्यान से देखने पर आधारित है। यह कला आपके निजी और प्रोफेशनल जीवन दोनों में बेहद मददगार हो सकती है।

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लाइफ लेसंस
आत्म-विकास – खुद को बेहतर बनाने की दिशा में पहला कदम, मनोवैज्ञानिक सुझाव – जीवन को आसान और समझदार बनाने के लिए

30 अनमोल लाइफ लेसंस जो आपकी ज़िंदगी बदल देंगे

जिंदगी के ये लेसंस किताबों में नहीं अनुभवों में मिलते हैं। यहाँ हम जानेंगे 30 ऐसे अनमोल सबक, जो आपको मुश्किलों में भी उम्मीद और रास्ता दिखाएंगे। इन्हें अपनाओ और अपनी जिंदगी को और बेहतर बनाओ।

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