फोबिया: जब डर आपके जीवन की दिशा बदल देता है
फोबिया क्या होता है? इसके प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं और ये हमारे मन व शरीर को कैसे प्रभावित करते हैं? इस ब्लॉग में जानें लक्षण, कारण और समाधान।
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भारत में मोटापा तेजी से एक नई महामारी के रूप में उभर रहा है। जानिए इसके पीछे के कारण, डराने वाले आंकड़े, और इससे निपटने के लिए जरूरी कदम – इस तथ्यपूर्ण और चेतावनी भरे ब्लॉग में।
“क्या हम दिमाग का सिर्फ 10% इस्तेमाल करते हैं? क्या बाएं-brain वाले लोग ही तर्कशील होते हैं? इस ब्लॉग में जानिए ऐसे 12 पॉपुलर माइंड मिथकों की सच्चाई, जो आपने अब तक सच माने थे – और जानिए दिमाग के पीछे की असली साइंस।”
क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे अंदर सच में कितने “आप” होते हैं? हमारा स्वयं (सेल्फ) एक जैसा और स्थिर नहीं होता। अलग-अलग परिस्थितियों, लोगों और भूमिकाओं में हमारा व्यवहार, विचार और भावनाएँ बदल जाती हैं। यही सेल्फ-प्लुरलिज़्म, सेल्फ-कॉम्प्लेक्सिटी और सेल्फ-कॉन्सेप्ट डिफरेंशिएशन की अवधारणाएँ हैं—जो हमें बताती हैं कि हमारे अंदर कई स्व होते हैं, जो हर माहौल में अलग-अलग रूप में दिखाई देते हैं। आइए, जानते हैं कि हमारे अंदर कितने “आप” हैं और ये कैसे हमारे व्यक्तित्व को बनाते हैं।
खुद को पहचानने में ब्रेन मैपिंग की क्या भूमिका है नाम: अर्पिता शर्मा, उम्र: 32 वर्ष, पेशा: कॉर्पोरेट मैनेजर (MNC),
भागदौड़ भरी जिंदगी और पैसे की होड़ ने हमारे पारिवारिक रिश्तों को गहराई से प्रभावित किया है। ओल्ड एज होम्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो समाज में बदलते मूल्यों और जनरेशन गैप की एक बड़ी तस्वीर पेश करती है।
सोच बदलो तो जिंदगी कैसे बदल जाएगी ! इस ब्लॉग में हम जानेंगें पॉजिटिव माइंडसेट के बारे में, और हम अपनी सोच को आसान और प्रैक्टिकल तरीकों से कैसे बदल सकते हैं इसका मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करेंगे।
क्या सच में प्यार अंधा होता है? जानिए मनोविज्ञान के नजरिए से प्यार और तर्क के बीच संतुलन कैसे बनता है। प्यार में भावनाओं और तर्क का क्या रोल होता है? पढ़ें पूरा विश्लेषण।
जिंदगी के ये लेसंस किताबों में नहीं अनुभवों में मिलते हैं। यहाँ हम जानेंगे 30 ऐसे अनमोल सबक, जो आपको मुश्किलों में भी उम्मीद और रास्ता दिखाएंगे। इन्हें अपनाओ और अपनी जिंदगी को और बेहतर बनाओ।
जीवन में दूसरा मौका देना एक सुनहरा अवसर होता है, लेकिन हर किसी को यह मौका नहीं मिलना चाहिए। जो लोग बार-बार आपके भरोसे को तोड़ते हैं, आपके साथ मुश्किल समय में खड़े नहीं होते, जो केवल लेना जानते हैं, चिर आलोचक होते हैं, या केवल अपने फायदे के लिए आपके साथ जुड़ते हैं, उन्हें दूसरा मौका न देना ही बेहतर होता है।