जो कहते हैं ‘मैं ठीक हूँ’, वही अंदर से टूटे होते हैं
‘मैं ठीक हूँ’ कई बार सच नहीं, बल्कि भावनाओं को दबाने का तरीका होता है। जानिए क्यों चुप रहने वाले लोग सबसे ज़्यादा मानसिक थकान झेलते हैं।
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हम toxic या जहरीले लोगों को इसलिए याद रखते हैं क्योंकि हमारा दिमाग “ख़तरे को न भूलने” के लिए डिज़ाइन हुआ है। लेकिन इंसान होने का मतलब सिर्फ survive करना नहीं बल्कि उसे ठीक करना भी है। Negativity Bias हमें चेतावनी देता है, पर उसी में फँसे रहना ज़रूरी नहीं।
जीवन में दूसरा मौका देना एक सुनहरा अवसर होता है, लेकिन हर किसी को यह मौका नहीं मिलना चाहिए। जो लोग बार-बार आपके भरोसे को तोड़ते हैं, आपके साथ मुश्किल समय में खड़े नहीं होते, जो केवल लेना जानते हैं, चिर आलोचक होते हैं, या केवल अपने फायदे के लिए आपके साथ जुड़ते हैं, उन्हें दूसरा मौका न देना ही बेहतर होता है।
Toxic रिश्ते से बाहर आना जितना मुश्किल होता है, उससे बाहर आकर खुद को दोबारा खड़ा करना उतना ही ज़रूरी होता है। इस लेख में Healing के 5 असरदार तरीके प्रस्तुत हैं जो मददगार साबित होंगें|
“क्या आपका रिश्ता आपको खुश रखने के बजाय तनाव और दुःख दे रहा है? टॉक्सिक रिश्तों को पहचानना आसान नहीं होता, लेकिन कुछ संकेत आपको यह समझने में मदद कर सकते हैं कि कहीं आप भावनात्मक रूप से शोषण का शिकार तो नहीं हो रहे। इस ब्लॉग में जानिए, कैसे पहचाने कि आप एक ज़हरीले रिश्ते में हैं और इससे बाहर निकलने के सही कदम क्या हो सकते हैं।”