आजकल रिश्ते क्यों टिक नहीं पा रहे?

शहरों में ब्रेकअप 40% बढ़ गए! 2 साल भी नहीं चल रहे रिश्ते।

सोशल मीडिया ने मार डाला !

इंस्टाग्राम-फेसबुक की परफेक्ट लव स्टोरीज़ असली रिश्तों को अधूरा और कमतर महसूस कराती हैं। लोग रिश्तों में कमियां तलाशने लगते हैं।

आज प्रेम रोमांच से शुरू होता है, लेकिन ऊब आते ही समाप्त हो जाता है। डोपामिन का प्रभाव कम होते ही भावनात्मक जुड़ाव बन नहीं पाता।

समस्या आई? ब्लॉक किया, अनफॉलो किया, आगे बढ़ गए। आज रिश्ते सुलझाए नहीं जाते, बल्कि बदल दिए जाते हैं।

लोग प्यार करते हैं, पर भावनाएं संभालना नहीं जानते। छोटी बात पर बड़ा झगड़ा। मैच्योरिटी शून्य

करीबी रिश्ता घुटन लगता है, झगड़ा होते ही दूरी बना ली जाती है। अब रिश्ते निभाने की जिम्मेदारी डर बन गई है।

आज लोग बोलते बहुत हैं, लेकिन ध्यान से सुनने की क्षमता कम हैं। सामने वाले की भावनाओं को समझने और स्वीकार करने को तैयार नहीं

आज रिश्ते शर्तों पर बनते हैं जिसमें कोई समझौते की जगह नहीं होती। एक आदत पसंद नहीं आयी तो लोग रिश्ता तोड़ने का सोच लेते हैं।

एम्बीशन्स और बिज़ी लाइफ में न क्वालिटी टाइम बचता है, न नज़दीकियाँ बढ़तीं हैं। जब साथ ही नहीं है, तो रिश्ता निभाना मुश्किल होगा ही।

रिश्ते इसलिए नहीं टूटते कि प्यार कम है, बल्कि इसलिए कि समझ, धैर्य और जिम्मेदारी कम है।

प्यार केवल भावना नहीं, एक स्किल है- जो सीखनी पड़ती है।