भावनात्मक संवेदनहीनता के 7 संकेत

क्या आप अंदर से खाली महसूस करते हैं?

भावनात्मक संवेदनहीनता क्या है?

 इसमें व्यक्ति अपनी भावनाओं को अच्छी तरह महसूस नहीं कर पाता-न खुशी, न दुख, न गुस्सा, न प्यार। यह तनाव, ट्रॉमा, डिप्रेशन या भारी मानसिक थकान के कारण होता है

आपको अपनी भावनाएँ समझने में दिक्कत होती है। यहाँ दिमाग भावनात्मक ओवरलोड से खुद को “बंद” कर देता है।

खुशखबरी आने पर भी ज्यादा खुशी नहीं, और बुरी खबर सुनने पर भी गहरा दुख नहीं महसूस होता।

दोस्तों, परिवार या रिश्तों के साथ रहते हुए भी आप खुद को अकेला या अलग‑थलग महसूस करते हैं।

बिना कारण थकान, भारीपन और “कुछ भी करने को मन नहीं” जैसा लगता है। बिना एनर्जी, बिना मोटिवेशन

दूसरों के दुखी होने पर भी आपको ज्यादा आपत्ति या उदासी नहीं होती। क्योंकि आप भावनात्मक रूप से सुन्न होते हैं।

पार्टी, फंक्शन या समूह में जाने की बजाय खाली कमरा, अकेला बैठना या फोन/स्क्रीन के साथ वक्त बिताने में ज्यादा सुकून

भावनाएं छिपाने की आदत दर्द हो तो भी “मैं ठीक हूँ” कहना।

बार-बार यही महसूस हो रहा है, तो यह तनाव, डिप्रेशन या भावनात्मक थकान का संकेत हो सकता है।

आपकी डेली लाइफ, रिश्ते या काम में दिक्कतें आने लगें, तो किसी मनोचिकित्सक से बात करना ज़रूरी है।