इसमें व्यक्ति अपनी भावनाओं को अच्छी तरह महसूस नहीं कर पाता-न खुशी, न दुख, न गुस्सा, न प्यार। यह तनाव, ट्रॉमा, डिप्रेशन या भारी मानसिक थकान के कारण होता है
आपको अपनी भावनाएँ समझने में दिक्कत होती है। यहाँ दिमाग भावनात्मक ओवरलोड से खुद को “बंद” कर देता है।
खुशखबरी आने पर भी ज्यादा खुशी नहीं, और बुरी खबर सुनने पर भी गहरा दुख नहीं महसूस होता।