डार्क साइकोलॉजी में दिमाग को कैसे कंट्रोल किया जाता है?

SASHA DUERR

डार्क साइकोलॉजी इंसान की भावनाओं और कमजोरियों का इस्तेमाल करके उसे नियंत्रित करने की कला है। 10-15% लोग रोज इसका इस्तेमाल करते हैं

आपकी यादों और समझ पर शक पैदा करने पर मजबूर करना। "तुम्हें गलत याद है" बार-बार बोलना

गैसलाइटिंग (Gaslighting)

अत्यधिक प्यार दिखाकर भावनात्मक निर्भरता बनाना। गिफ्ट्स और प्यार की बौछार, फिर अचानक ठंडापन

लव बॉम्बिंग  (Love Bombing)

महसूस कराया जाता है कि वह गलत है, भले ही वह सही हो। "हम तुम्हारी वजह से दुखी हैं" भावनात्मक ब्लैकमेल करना

गिल्ट ट्रिपिंग  (Guilt Tripping)

आपकी बॉडी लैंग्वेज और शब्द कॉपी करके भरोसा जीतना, बाद में नियंत्रण कर लेना।

मिररिंग  (Mirroring)

विकल्प दिए जाते हैं, लेकिन हर रास्ता एक ही जगह ले जाता है।“तुम यह काम अभी करोगे या रात में?” करना है या नहीं- पूछा ही नहीं गया।

फॉल्स चॉइस  (False Choice)

तारीफ के साथ अपमान या आत्मविश्वास तोड़ने वाली बातें कहना। “तुम अच्छी दिखती हो, लेकिन थोड़ा फिट होती तो परफेक्ट लगती।”

नेगिंग (Negging)

जानबूझकर चुप रहना, बोलना बंद कर देना ताकि सामने वाला बेचैन हो, खुद को दोषी माने और उसका मनचाहा व्यवहार करे।

साइलेंट ट्रीटमेंट  (Silent Treatment)

डर इंसान की तर्क क्षमता बंद कर देता है तब उसे कंट्रोल करना आसान हो जाता है। विज्ञापनों में बीमारी या असफलता का डर।

डर का उपयोग  (Fear Manipulation)

अपनी कमजोरियां पहचानें। ऐसे लोगों से दूरी बनायें। तथ्यों पर ध्यान दें, डायरी लिखें। विश्वसनीय लोगों से बात करें। जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

बचाव के उपाय

ये ट्रिक्स हर जगह हैं जागरूक रहें, आज़ाद रहें 👁️