हमारे इमोशंस शरीर को कैसे कंट्रोल कर लेते हैं?
क्या आपने महसूस किया है?
डर लगते ही दिल तेज़ धड़कता है…गुस्से में चेहरा गर्म हो जाता है…चिंता में पेट गड़बड़ हो जाता है…
ये सब अपने आप क्यों होता है?
क्योंकि इमोशंस पहले शरीर पर असर करते हैं,
बाद में दिमाग़ तक पहुंचते हैं
Body First – Brain Later
शरीर पहले खतरा पहचानता है
फिर दिमाग को सिग्नल भेजता है।
नर्वस सिस्टम एक्टिव हो जाता है
इमोशन आते ही
नर्वस सिस्टम अलर्ट मोड में चला जाता है।
लड़ो या भागो मोड (Fight or Flight)
दिल तेज़, सांस तेज़, मांसपेशियाँ टाइट, पाचन प्रक्रिया धीमी
दिमाग क्यों ब्लैंक हो जाता है?
क्योंकि दिमाग़ का सोचने वाला हिस्सा कुछ देर के लिए बंद हो जाता है।
इस स्थिति को कहते हैं इमोशन हाईजैक
जब इमोशंस
आपको कंट्रोल करने लगते हैं।
शरीर ऐसा क्यों करता है?
आपको नुकसान पहुँचाने के लिए नहीं…
बल्कि बचाने के लिए।
क्या इसे कंट्रोल किया जा सकता है?
इमोशंस को तो नहीं…लेकिन शरीर को शांत किया जा सकता है।
शरीर को शांत कैसे करें?
धीमी गहरी सांस,
जमीन को महसूस करना,
खुद को सुरक्षित महसूस कराना,
जब शरीर शांत होता है…
तो इमोशंस भी
अपने आप शांत होने लगते हैं।
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