अदालतों में भी गवाह की याददाश्त हमेशा 100% सही नहीं होती। दिमाग दबाव में गलतियां कर सकता है।
उम्र बढ़ने पर हिप्पोकैंपस (यादों का केंद्र) सिकुड़ता है। न्यूरल कनेक्शन कमजोर होते हैं, दिमाग छोटी-मोटी बातें छोड़ देता है, भावनात्मक अर्थ वाली बातें बचा कर रखता है।