Dr. Seema Tripathi
म्यूजिक थेरेपी एक वैज्ञानिक, क्लिनिकल प्रक्रिया है जिसमें तनाव, मूड या दर्द घटाने पर सेशन चलता है। इसमें सुनना, गुनगुनाना, वाद्ययंत्र बजाना, रिदम पर चलना आदि शामिल होता है।
पसंदीदा संगीत सुनने पर दिमाग से ‘फील‑गुड’ केमिकल्स जैसे डोपामिन और एंडॉर्फिन निकलते हैं, जो मूड को बेहतर बनाते हैं और दर्द की अनुभूति घटाते हैं।
गानों के बोल और धुन के ज़रिए व्यक्ति अपनी भावनाएँ पहचानना और व्यक्त करना सीखता है, जो हीलिंग का बड़ा हिस्सा है।
शांत संगीत शरीर में तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल को कम करता है, जिससे दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर संतुलित रहने में मदद मिलती है।
स्टडीज़ में पाया गया कि म्यूजिक थेरेपी लेने वाले लोगों में स्ट्रेस, बेचैनी और चिंता के लेवल काफ़ी कम हो जाते हैं, खासकर अस्पताल, आईसीयू या ऑपरेशन से पहले की स्थिति में।
संगीत सुनते समय दिमाग़ का ध्यान दर्द से हटकर ध्वनि पर जाता है, दर्द का सिग्नल को धीमा, मांसपेशियों की जकड़न ढीली होती है, क्रॉनिक दर्द में मददगार
शास्त्रीय संगीत में कई राग ऐसे माने गए हैं जो शांति, एकाग्रता या उत्साह जगाते हैं; यही वजह है कि भारतीय राग म्यूजिक थेरेपी की आत्मा माने जाते हैं।
म्यूजिक थेरेपी अब केवल ‘शौक’ नहीं, बल्कि वैज्ञानिक रिसर्च से समर्थित एक मान्यता प्राप्त थैरेपी है जो दिमाग, दिल और शरीर- तीनों पर काम करती है।
हर दिन 10–15 मिनट के लिए ऐसा शांत संगीत सुनें जो आपको सुकून दे, सोने से पहले, मेडिटेशन के साथ या मॉर्निंग रूटीन में।