ये आदत धीरे-धीरे डिप्रेशन की तरफ ले जाती है
हर बात अंदर ही अंदर दबा लेना- दुख, गुस्सा, थकान- सब कुछ
कौन सी आदत ?
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कमजोरी न दिखे इसलिए, बचपन की सीख से, समाज के दबाव या रिश्ते बिगड़ने के डर से भावनाएं दबाते हैं।
भावनाएं क्यों दबाते हैं लोग?
जब भावनाएँ बाहर नहीं आतीं, तो वो मन में बोझ बन जाती हैं-यहीं से मानसिक थकान शुरू होती है
फिर अंदर क्या होता है?
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अकेलापन बढ़ना, बात करने का मन न करना, हर चीज़ में रूचि कम होना, बिना वजह थकान
धीरे-धीरे व्यवहार बदलता है
यही डिप्रेशन की शुरुआत हो सकती है
डिप्रेशन हमेशा अचानक नहीं आता, कई बार ये चुप रहने की आदत से शुरू होता है
किसी भरोसेमंद इंसान से बात करें, बहुत मजबूत बनने की ज़रूरत नहीं, अपनी भावनाओं को समझें
इससे बाहर कैसे निकलें?
भावनाओं को डायरी में लिखें, गुस्सा आए तो गहरी सांस लें। संगीत सुनें, माइंडफुलनेस प्रैक्टिस करें।
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याद रखिए ❤️
मन में दबी बात कहना कमज़ोरी नहीं, खुद की देखभाल है
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