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Entitlement Syndrome
आत्म-विकास और आदतें, मनोवैज्ञानिक तथ्य और व्यावहारिक सुझाव, व्यवहारिक मनोविज्ञान

मुझे सब मिलना ही चाहिए-क्या ये सोच युवाओं को कमज़ोर बना रही?

“मुझे सब कुछ मिलना चाहिए” — यह सोच जितनी आकर्षक लगती है, उतनी ही खतरनाक भी है। यह व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है। यदि हम एक संतुलित और सफल जीवन चाहते हैं, तो हमें अधिकार की नहीं, जिम्मेदारी की भावना को अपनाना होगा।

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Phobia
मनोवैज्ञानिक तथ्य और व्यावहारिक सुझाव, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जागरूकता

फोबिया: जब डर आपके जीवन की दिशा बदल देता है

फोबिया क्या होता है? इसके प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं और ये हमारे मन व शरीर को कैसे प्रभावित करते हैं? इस ब्लॉग में जानें लक्षण, कारण और समाधान।

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मोटापा : भारत की अगली महामारी
आत्म-विकास और आदतें, व्यवहारिक मनोविज्ञान

भारत में बढ़ता मोटापा: क्या यह अगली स्वास्थ्य महामारी है?

भारत में मोटापा तेजी से एक नई महामारी के रूप में उभर रहा है। जानिए इसके पीछे के कारण, डराने वाले आंकड़े, और इससे निपटने के लिए जरूरी कदम – इस तथ्यपूर्ण और चेतावनी भरे ब्लॉग में।

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दिमाग से जुड़े मिथक
मनोवैज्ञानिक तथ्य और व्यावहारिक सुझाव, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जागरूकता, शरीर और मन का संबंध

दिमाग से जुड़े 20 पॉपुलर लेकिन झूठे विश्वास

“क्या हम दिमाग का सिर्फ 10% इस्तेमाल करते हैं? क्या बाएं-brain वाले लोग ही तर्कशील होते हैं? इस ब्लॉग में जानिए ऐसे 12 पॉपुलर माइंड मिथकों की सच्चाई, जो आपने अब तक सच माने थे – और जानिए दिमाग के पीछे की असली साइंस।”

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Multiple selves theory
मनोवैज्ञानिक तथ्य और व्यावहारिक सुझाव, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जागरूकता, व्यवहारिक मनोविज्ञान

कभी आपने सोचा? हर आदमी में होते हैं, दस-बीस आदमी

क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे अंदर सच में कितने “आप” होते हैं? हमारा स्वयं (सेल्फ) एक जैसा और स्थिर नहीं होता। अलग-अलग परिस्थितियों, लोगों और भूमिकाओं में हमारा व्यवहार, विचार और भावनाएँ बदल जाती हैं। यही सेल्फ-प्लुरलिज़्म, सेल्फ-कॉम्प्लेक्सिटी और सेल्फ-कॉन्सेप्ट डिफरेंशिएशन की अवधारणाएँ हैं—जो हमें बताती हैं कि हमारे अंदर कई स्व होते हैं, जो हर माहौल में अलग-अलग रूप में दिखाई देते हैं। आइए, जानते हैं कि हमारे अंदर कितने “आप” हैं और ये कैसे हमारे व्यक्तित्व को बनाते हैं।

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मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जागरूकता, शरीर और मन का संबंध

आपके विचार शरीर को बीमार कर रहे हैं-साइकोसोमैटिक डिसऑर्डर

हमारे विचार केवल हमारे मानसिक अनुभव ही नहीं बनाते, बल्कि वे हमारे शरीर की सेहत पर भी गहरा असर डालते हैं। नकारात्मक सोच और लगातार तनाव से शरीर में कई प्रकार की बीमारियाँ जन्म ले सकती हैं, जबकि सकारात्मक सोच और मानसिक शांति से स्वास्थ्य बेहतर होता है।

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healthy life
मनोवैज्ञानिक तथ्य और व्यावहारिक सुझाव, शरीर और मन का संबंध

हर घंटे 1 मिनट दो : हेल्दी लाइफ की गारंटी लो

हर घंटे 1 मिनट अपने लिए निकालना न सिर्फ आपकी सेहत को बेहतर करेगा, बल्कि आपकी उम्र भी बढ़ा सकता है। यह आदत धीरे-धीरे आपकी जिंदगी में बड़ा बदलाव लाएगी, जिससे आप न केवल शारीरिक रूप से बल्कि मानसिक रूप से भी बेहतर महसूस करेंगे।

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social rejection = physical pain
आत्म-विकास और आदतें, मनोवैज्ञानिक तथ्य और व्यावहारिक सुझाव, शरीर और मन का संबंध

दिल टूटे या पैर, दिमाग दोनों को एक जैसा महसूस करता है

क्या दिल टूटने का दर्द वाकई असली होता है? न्यूरोसाइंस कहता है – हां! आपका दिमाग ब्रेकअप या भावनात्मक चोट को उसी तरह महसूस करता है जैसे किसी फिजिकल इंजरी को। जानिए इसका मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक कारण।

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ब्रेन मैपिंग
आत्म-विकास और आदतें, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जागरूकता

खुद को पहचानने में ब्रेन मैपिंग की क्या भूमिका है

खुद को पहचानने में ब्रेन मैपिंग की क्या भूमिका है नाम: अर्पिता शर्मा, उम्र: 32 वर्ष, पेशा: कॉर्पोरेट मैनेजर (MNC),

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अकेले पड़ते बुजुर्ग
मनोवैज्ञानिक तथ्य और व्यावहारिक सुझाव, मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक जागरूकता, व्यवहारिक मनोविज्ञान

पैसे की दौड़ में खोए रिश्ते: ओल्डएज होम्स की संख्या बढ़ी

भागदौड़ भरी जिंदगी और पैसे की होड़ ने हमारे पारिवारिक रिश्तों को गहराई से प्रभावित किया है। ओल्ड एज होम्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जो समाज में बदलते मूल्यों और जनरेशन गैप की एक बड़ी तस्वीर पेश करती है।  

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