आजकल रिश्ते जल्दी क्यों टूट रहे हैं? जानिए 8 मनोवैज्ञानिक कारण
रिलेशनशिप साइकोलॉजी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो लोगों को अपने रिश्तों को बेहतर ढंग से समझने और स्वस्थ रिश्ते बनाने में मदद करता है। यह रिश्तों में लोगों के व्यवहार, भावनाओं, और विचारों को समझने की कोशिश करता है, और यह लोगों को अपने रिश्तों में सुधार करने में मदद कर सकता है।
आज के समय में रिलेशनशिप्स बनाना जितना आसान हो गया है, उन्हें निभाना उतना ही मुश्किल होता जा रहा है। एक समय था जब रिश्ते जीवनभर चलते थे, लोग रिश्ते निभाने का प्रयास अंतिम समय तक करते थे लेकिन अब ब्रेकअप और डिवोर्स की दरें तेजी से बढ़ रही हैं।
सवाल यह उठता है कि ऐसा क्यों हो रहा है? क्या सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स, आधुनिक जीवन शैली, या हमारी बदलती मानसिकता इसके पीछे जिम्मेदार है? अथवा कुछ और ? आइए इस मुद्दे को मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझते हैं।
क्या कहते हैं आंकड़े ?
पिछले कुछ वर्षों में रिश्तों, तलाक़ और ब्रेकअप को लेकर चर्चा पहले से कहीं अधिक बढ़ी है। इसका एक संकेत फैमिली कोर्ट्स में बढ़ते मामलों से भी मिलता है। हालांकि हर फैमिली कोर्ट केस ब्रेकअप या तलाक का मामला नहीं होता, लेकिन यह आंकड़े रिश्तों में बढ़ते तनाव और संघर्ष की ओर जरूर इशारा करते हैं।
- भारत की 848 फैमिली कोर्ट्स में 2024 के दौरान लगभग 6.43 लाख नए पारिवारिक विवादों के मामले दर्ज हुए, जबकि वर्ष के अंत तक करीब 12.42 लाख मामले लंबित थे।
- अकेले उत्तर प्रदेश में 2024 के दौरान फैमिली कोर्ट्स में लगभग 2.88 लाख मामले दर्ज हुए, और लंबित मामलों की संख्या लगभग 4 लाख तक पहुंच गई।
- गुजरात में फैमिली कोर्ट के नए मामलों की संख्या 2023 के लगभग 27 हजार से बढ़कर 2024 में 62 हजार से अधिक हो गई।
NFHS-आधारित रिपोर्ट के अनुसार पिछले पाँच सालों में तलाक के मामलों में 35% बढ़ोतरी दर्ज की गई है.abplive
UN-आधारित रिपोर्ट के हवाले से 2005 में तलाक की दर 0.6% थी, जो 2019 में बढ़कर 1.1% बताई गई है।
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रिश्तों के टूटने के 8 मनोवैज्ञानिक कारण
यहाँ हम कुछ प्रमुख कारणों पर चर्चा कर रहें जो रिश्तों में मुख्य भूमिका निभाते हैं –
1. तात्कालिक संतुष्टि और कम सहनशीलता
इसे मनोविज्ञान की भाषा में “इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन” कहते हैं जिसका मतलब है कि बिना किसी देरी के तुरंत संतुष्टि की इच्छा| क्या आप जानते हैं कि हमारे दिमाग को अब इंस्टेंट ग्रैटिफिकेशन (तुरंत संतुष्टि) की आदत पड़ चुकी है ? आज के डिजिटल युग में सब कुछ एक क्लिक में उपलब्ध है। फूड ऑर्डर करने से लेकर डेटिंग ऐप्स तक, हमें हर चीज़ जल्दी चाहिए। किसी भी चीज के लिए इंतज़ार करना या धैर्य रखना आज हमारे वश में नहीं है |
इसी तरह जब हम रिश्तों में भी तुरंत परफेक्शन की उम्मीद करते हैं, तो धैर्य कम हो जाता है। नतीजतन, छोटी-छोटी समस्याओं को झेलने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे ब्रेकअप बढ़ते हैं।
कैसे बचें?
- अपने रिश्ते में धैर्य बनाए रखें।
- परफेक्ट पार्टनर” के भ्रम से बचें।
- किसी भी समस्या पर खुलकर बात करें।
- किसी को समझने में थोड़ा समय दें |
2. जुड़ाव का तरीका और बचपन के अनुभव
आपका बचपन आपके रिश्तों को कैसे प्रभावित करता है ? मनोवैज्ञानिक जॉन बॉल्बी (John Bowlby) के अनुसार, हम अपने बचपन के अनुभवों के आधार पर रिश्तों में जुड़ाव का तरीका विकसित करते हैं।
मुख्य अटैचमेंट स्टाइल:
1. सुरक्षित लगाव: ऐसे लोग रिश्तों में भरोसा बनाए रखते हैं और कम ब्रेकअप करते हैं।
2. बचने वाला लगाव: ये लोग भावनाओं को दबाते हैं और दूरी बनाए रखना पसंद करते हैं।
3. चिंताग्रस्त लगाव: ये लोग अत्यधिक जुड़ाव चाहते हैं और पार्टनर की प्रतिक्रिया से असुरक्षित महसूस करते हैं।
4. अव्यवस्थित लगाव: बचपन में ट्रॉमा झेलने वाले लोगों में यह स्टाइल पाया जाता है।
कैसे बचें?
- अपने अटैचमेंट स्टाइल को पहचानें।
- यदि आपको बचपन के अनुभव प्रभावित कर रहे हैं, तो थेरेपी पर विचार करें।
- रिश्तों में भरोसा और समझदारी विकसित करें।
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3. सोशल मीडिया और तुलना की समस्या
क्या इंस्टाग्राम और फेसबुक आपके रिश्ते को बर्बाद कर रहे हैं? सोशल मीडिया पर हर कोई अपने रिश्ते को परफेक्ट दिखाता है। जब हम इसे देखते हैं, तो हमें अपने रिश्ते अधूरे लगते हैं। यह तुलना असंतोष और ब्रेकअप की ओर ले जाती है।
“FOMO (Fear of Missing Out)” का असर रिलेशनशिप में नेगेटिविटी बढ़ा सकता है।
कैसे बचें?
- सोशल मीडिया पर रिलेशनशिप की तुलना करने से बचें।
- अपने रिश्ते में वास्तविक खुशी पर ध्यान दें, न कि ऑनलाइन परफेक्शन पर।
- रिश्तों में कमियां तलाशने की जगह खूबियां देखें
4. “डील ब्रेकर” की संख्या बढ़ गई है
पहले लोग छोटी-मोटी समस्याओं को नजरअंदाज कर देते थे, लेकिन अब हर कोई अपनी “डील ब्रेकर” लिस्ट लिए घूमता है। हर रिश्ता शर्तों पर नहीं चलता, ये याद रखना जरुरी है। अगर पार्टनर की कोई आदत पसंद नहीं आई, तो लोग तुरंत ब्रेकअप की सोचने लगते हैं।
“Red Flags” पहचानना ज़रूरी है, लेकिन छोटी चीज़ों को सहन करना भी महत्वपूर्ण है।
कैसे बचें?
- पार्टनर की छोटी कमियों को स्वीकार करना सीखें।
- सिर्फ बड़ी समस्याओं (जैसे धोखा, अपमान) पर ध्यान दें।
- धैर्य रखना और समय देना जरूरी है |
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5. आपसी संवाद की कमी
मनोवैज्ञानिक रिसर्च बताती है कि अधिकतर ब्रेकअप गलतफहमियों और कम्युनिकेशन गैप की वजह से होते हैं। यह बहुत आम है की आपसी मनमुटाव या झगड़े में खुल कर बातचीत करना ही एकमात्र रास्ता होता है। हम अपनी भावनाओं को सही से व्यक्त नहीं करते और छोटी बातें बड़े झगड़ों का रूप ले लेती हैं।
कैसे बचें?
- हर छोटी समस्या पर खुलकर बात करें।
- Active Listening (सुनने की कला) सीखें।
- पार्टनर की भावनाओं को समझने की कोशिश करें।
6. अपनी आज़ादी और समर्पण में संतुलन
व्यक्तिवाद का मूल सिद्धांत यह है कि प्रत्येक व्यक्ति का अपना मूल्य होता है और उसे अपने निर्णय लेने और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का अधिकार है जबकि समर्पण व्यक्ति के लिए समूह या समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने और उसकी भलाई के लिए काम करने पर जोर देता है।
आज की पीढ़ी “Self-Love” और “आज़ादी” पर ज्यादा ध्यान देती है। यह अच्छी बात है, लेकिन कभी-कभी लोग रिश्तों में ज़रूरी समर्पण को भूल जाते हैं। वो पाना तो चाहते हैं लेकिन देना नहीं चाहते। इससे रिश्तों को बिगड़ने में देर नहीं लगता। कुछ लोग “सिर्फ अपने लिए जीना चाहते हैं” और किसी तरह की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते।
कैसे बचें?
• रिश्ते में संतुलन बनाएं।
• अपनी स्वतंत्रता और कमिटमेंट के बीच सामंजस्य रखें।
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7. मानसिक स्वास्थ्य और तनाव
क्या डिप्रेशन और एंग्जायटी आपके रिश्ते को प्रभावित कर सकते हैं? मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, जैसे कि डिप्रेशन, एंग्जायटी और स्ट्रेस, रिश्तों में नेगेटिव इफेक्ट डाल सकते हैं। जब एक पार्टनर मानसिक रूप से संघर्ष कर रहा होता है, तो यह रिश्ता तनावपूर्ण बन सकता है। मन की बातों को एक दूसरे से शेयर करें।
कैसे बचें?
- मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें।
- यदि ज़रूरत हो, तो काउंसलिंग या थेरेपी लें।
- पार्टनर को समझें, समय दें और सपोर्ट करें।
8. अपेक्षाओं का प्रेशर
एक्सपेक्टेशन प्रेशर का मतलब होता है लोगों की अपेक्षाओं के कारण होने वाला तनाव। यह तनाव तब हो सकता है जब हम खुद से या दूसरों से बहुत ज़्यादा उम्मीदें रखते हैं या जब दूसरों की अपेक्षाएं हम पर बहुत ज़्यादा दबाव डालती हैं।
आजकल लोग अपने पार्टनर से अत्यधिक उम्मीदें रखने लगे हैं। फिल्मों, सोशल मीडिया और कहानियों की वजह से हम सोचते हैं कि जिंदगी वैसे ही रूमानी और मस्त होती है | हम चाहते हैं कि हमारा पार्टनर हमें हर समय खुश रखे। और जब यह संभव नहीं होता, तो निराशा और ब्रेकअप होते हैं।
कैसे बचें?
- वास्तविक अपेक्षाएं रखें।
- रिश्ते में परफेक्शन से ज्यादा समझदारी को महत्व दें।
- आभासी दुनियां (सोशल मीडिया और फिल्मों) से प्रभावित न हों |
- अपनी सीमाएं निर्धारित करें, यह निर्धारित करें कि आप क्या कर सकते हैं और क्या नहीं।
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निष्कर्ष:
रिलेशनशिप को सफल बनाने के लिए सिर्फ प्यार ही काफी नहीं होता, समझदारी, धैर्य, और सही कम्युनिकेशन भी ज़रूरी हैं। रिश्ते बनाना आसान है लेकिन रिश्तों को बनाये रखना मुश्किल काम होता है।
अपने पार्टनर के प्रति सहानुभूति रखें। छोटी-मोटी परेशानियों को बड़ा मुद्दा न बनाएं। सोशल मीडिया की तुलना से बचें। समय-समय पर आत्मविश्लेषण करें। अपने हित से ऊपर उठ कर परिवार को हित सोचें। अगर हम इन मनोवैज्ञानिक पहलुओं को समझें और उन पर काम करें, तो रिश्तों की मजबूती को बनाए रखना आसान हो जाएगा।
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भावनात्मक दूरी: आधुनिक रिश्तों में बढ़ती समस्या
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