क्या पेट खराब होने पर आपका मूड खराब हो जाता है? इसका कारण आपकी आंतों में छुपा ‘दूसरा दिमाग’ हो सकता है!

By: Dr. Seema Tripathi

जानिए गट-ब्रेन के राज़!

आंतों को दूसरा दिमाग क्यों कहते हैं?

मस्तिष्क में 9-10 करोड़ नर्व सेल्स होते हैं, जबकि आपके आंतों में 1 करोड़ से ज़्यादा नर्व सेल्स होती हैं, जो बिना दिमाग के आदेश के पाचन चलाती हैं। अद्भुत है न?

पेट का दिमाग: एंटरिक नर्वस सिस्टम

आंतों में मौजूद यह सिस्टम स्वतंत्र रूप से सोचता है। यह भोजन पचाने से लेकर मूड कंट्रोल तक करता है। दिमाग से सीधा कनेक्शन!

गट-ब्रेन एक्सिस: दो दिमागों का पुल

वेगस नर्व के ज़रिए आंतें दिमाग को सिग्नल भेजते है, पेट खराब है तो थकान, चिड़चिड़ापन, बेचैनी, भारीपन।

तनाव-चिंता का राज़

शरीर का 90% से ज़्यादा सेरोटोनिन (ख़ुशी का हार्मोन) यहीं बनता है। यानी प्रसन्नता, शांति, बेचैनी- सबकी जड़ पेट में है।

पाचन का स्वतंत्र बॉस

यह सिस्टम भोजन को तोड़ता है, एंजाइम्स छोड़ता है। खराब गट से अल्जाइमर, डिप्रेशन का खतरा बढ़ता है। मस्तिष्क सिर्फ देखता रह जाता है!

पेट में तितलियां उड़ने जैसा अहसास?

ख़ुशी या घबराहट में दिमाग पेट को सिग्नल भेजता है। पेट में ब्लड कम जाता है तो आंतें तेज हिलने लगती हैं। यही है तितलियों का राज़!

गट हेल्थ सुधारें

फाइबर, प्रोबायोटिक्स खाएं। नींद पर्याप्त, तनाव कम, योग, ध्यान से वेगस नर्व मजबूत करें। एंटीबायोटिक्स कम करें। जंक फूड छोड़ें!

हमारे आंतों की डिमांड

दूसरा दिमाग कहता है- मुझे ज़्यादा नहीं चाहिए- बस एक नियमित समय पर सादा खाना और थोड़ी शांति।

मुझे बहुत ज़्यादा दवाइयाँ नहीं, ज़्यादा प्रोसेस्ड फूड नहीं- बस संतुलन चाहिए।

अपने पेट की सुनिए… क्योंकि वह सिर्फ पेट नहीं, आपका दूसरा दिमाग है।

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