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गट हेल्थ क्या है? आंतों की सेहत सुधारने के आसान तरीके

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गट हेल्थ क्या है? आंतों की सेहत सुधारने के आसान तरीके

Gut Health

क्या आपको बार-बार पेट की समस्या, थकान, मूड स्विंग्स या स्किन प्रॉब्लम होती है? तो हो सकता है कि इसका कारण आपकी गट हेल्थ (आंतों का स्वास्थ्य) हो। हाल के वर्षों में गट हेल्थ पर रिसर्च से पता चला है कि हमारी आंतें सिर्फ पाचन का काम ही नहीं करतीं, बल्कि यह शरीर और दिमाग दोनों को प्रभावित करती हैं।

गट हेल्थ यानी आंतों की सेहत को बहुत आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं: हमारे पेट और आंतों में करोड़ों छोटे-छोटे बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्म जीव रहते हैं। इन्हें मिलाकर “गट माइक्रोबायोम” कहा जाता है।

ये बैक्टीरिया हमारे खाने को पचाने, उसमें से जरूरी पोषक तत्व निकालने और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। अगर ये बैक्टीरिया संतुलन में रहते हैं तो हमारा पेट, दिमाग और पूरा शरीर अच्छा चलता है। अगर इनमें गड़बड़ी हो जाए तो पेट की समस्या, थकान, मूड खराब रहना, कब्ज, गैस, डिप्रेशन जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। इस लेख में हम विस्तार से गट हेल्थ को जानेंगे।

आँतों को ‘दूसरा दिमाग’ भी कहा जाता है

हमारे गट को शरीर में स्थित दूसरा दिमाग क्यों कहा जाता है यह जानना और समझना भी जरुरी है। आपने सुना होगा- “दिल से सोचो” या “दिमाग से सोचो”, लेकिन अब वैज्ञानिक कहते हैं- “पेट से भी सोचो!” ऐसा क्यों कहा गया है, क्योंकि – हमारे गट में मौजूद एक खास तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को Enteric Nervous System (ENS) कहा जाता है, जिसमें 10 करोड़ से भी ज़्यादा न्यूरॉन्स होते हैं। यह गिनती हमारे स्पाइनल कॉर्ड में मौजूद न्यूरॉन्स से भी ज़्यादा होती है! इसके अतिरिक्त –

क्या आपकी आंतें भी सोचती हैं? जानिए ‘दूसरे दिमाग’ का रहस्य

1. हमारा गट अपने आप फैसले ले सकता है:

हमारे आंतों में स्थित ENS हमारे दिमाग से बिना पूछे खुद निर्णय ले सकता है- जैसे भोजन को आगे भेजना, ऐंठन, सिग्नल देना कि कुछ गड़बड़ है आदि। यही कारण है कि हमें किसी विशेष बात पर “पेट में गड़बड़”, “घबराहट”, या “पूर्वानुमान” जैसी अनुभूतियाँ होती हैं।

2. गट न्यूरोट्रांसमीटर्स बनाता है:

हमारे गट में सेरोटोनिन (Serotonin), डोपामिन (Dopamine) जैसे “मूड, ख़ुशी और फीलिंग कंट्रोल करने वाले हार्मोन” बनते हैं। यह दिमाग को सीधे संकेत देते हैं- इसलिए गट हेल्थ खराब होने पर डिप्रेशन, तनाव और मूड स्विंग्स भी बढ़ते हैं।

3. गट और ब्रेन सीधा जुड़े हैं:

हमारे शरीर में एक मोटी नस है जो गट और मस्तिष्क को real-time जोड़ती है। यही नस गट-ब्रेन एक्सिस का सबसे अहम हिस्सा है। इसलिए वैज्ञानिक गट को ‘Second Brain’ कहते हैं, और इसकी देखभाल को मानसिक स्वास्थ्य जितनी ही प्राथमिकता देते हैं।

आँतों और दिमाग का रिश्ता – “गट-ब्रेन एक्सिस” क्या है?

Gut-Brain Axis शरीर का वह अदृश्य पुल है, जो यह तय करता है कि आपका पेट कैसा है और मन कैसा महसूस करता है। अगर आंतें स्वस्थ हैं, तो मन भी शांत और खुश रहेगा। इसी कारण आजकल डॉक्टर और साइकोलॉजिस्ट भी गट हेल्थ को मानसिक स्वास्थ्य से जोड़कर देखने लगे हैं। गट-ब्रेन एक्सिस एक दो तरफ़ा कम्युनिकेशन सिस्टम है, जो हमारे आंत (gut) और मस्तिष्क (brain) को जोड़ती है। यह मुख्य रूप से तीन चीज़ों के ज़रिए काम करता है:

1. नर्वस सिस्टम (विशेष रूप से Vagus Nerve)

वेगस नर्व शरीर की सबसे लंबी नसों में से एक है जो सीधे आंत से मस्तिष्क को जोड़ती है। जब आंतों में कोई समस्या होती है (जैसे सूजन, गैस, बैक्टीरिया असंतुलन), तो वह सिग्नल सीधे दिमाग तक पहुँचता है। वेगस तंत्रिका पाचन तंत्र को उत्तेजित करती है, जिससे भोजन को पचाने में मदद मिलती है। यह आंत में सूजन को कम करने में मदद करती है। यह सूजन को नियंत्रित करने वाले रसायनों को जारी करके और आंत के स्तर को स्वस्थ रखकर काम करता है। 

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2. हार्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर

गट में लगभग 90% सेरोटोनिन (हैप्पी हार्मोन) का उत्पादन होता है, जो मूड को नियंत्रित करता है। आंतें डोपामिन, GABA, और अन्य न्यूरोकेमिकल्स भी बनाती हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। जब गट में गड़बड़ी होती है, तो इन हार्मोनों का संतुलन बिगड़ता है और व्यक्ति को डिप्रेशन, चिंता (anxiety), या मूड स्विंग्स होने लगते हैं।

3. इम्यून सिस्टम और सूजन 

हमारी आंतें शरीर के इम्यून सिस्टम (प्राकृतिक रक्षा तंत्र) का बड़ा हिस्सा नियंत्रित करती हैं। यदि गट में लीकी गट या बैक्टीरिया का असंतुलन होता है, तो शरीर में सूजन (chronic inflammation) बढ़ सकती है, जो मानसिक विकारों से जुड़ी होती है। जितने बैक्टीरिया आंतों में रहते हैं, वो हमारे शरीर की सभी कोशिकाओं से भी ज़्यादा हैं!

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कैसे गट (आंतें) दिमाग को प्रभावित करता है

गट में समस्यामस्तिष्क पर प्रभाव
खराब बैक्टीरियातनाव, एंग्जायटी, नींद की कमी
सेरोटोनिन हार्मोन की कमीडिप्रेशन, निराशा
पाचन में गड़बड़ीचिड़चिड़ापन, थकान, फोकस में कमी

जब आप तनाव में होते हैं, तो आंतों की गति (motility) और एंजाइम secretion बदल जाते हैं। इससे पेट दर्द, अपच, दस्त या कब्ज की समस्या हो सकती है। मानसिक तनाव आंतों की परत को भी नुकसान पहुँचा सकता है। आपने कभी नोटिस किया होगा कि जब आप तनाव में होते हैं तो भूख कम हो जाती है, या पेट में मरोड़ उठती है।
या जब आप खुश होते हैं, तो खाना भी अच्छे से पचता है- ये गट-ब्रेन कनेक्शन का ही असर है।

https://www.betterhealth.vic.gov.au/health/healthyliving/gut-health

गट हेल्थ और रोग प्रतिरोधक क्षमता का रिश्ता

आपकी आंत सिर्फ खाना पचाने का ही काम नहीं करती, बल्कि यह आपके शरीर का सबसे बड़ा इम्यून ऑर्गन भी है।
जानिए कुछ चौंकाने वाले तथ्य:
– शरीर के लगभग 70% इम्यून सेल्स आंतों की दीवारों (gut lining) में रहते हैं।
– गट में रहने वाले माइक्रोबायोम – यानी अच्छे और बुरे बैक्टीरिया, इम्यून सिस्टम को ट्रेन और सक्रिय करते हैं।
– एक संतुलित गट माइक्रोबायोम ही तय करता है कि कौन-से वायरस, बैक्टीरिया या एलर्जी से लड़ना है और किसे नजरअंदाज करना है।

गट कैसे प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है?

1. अच्छे बैक्टीरिया (Good Bacteria) की भूमिका

• आंतों में लाखों करोड़ों अच्छे बैक्टीरिया रहते हैं जो शरीर को बाहरी संक्रमणों से लड़ने में मदद करते हैं।
• ये बैक्टीरिया “बैरियर” की तरह काम करते हैं – जैसे एक गार्ड जो हानिकारक तत्वों को शरीर में घुसने से रोकता है।

2. Immune Cells का प्रशिक्षण 

• गट में मौजूद विशेष इम्यून सेल्स (जैसे T-cells) सीखते हैं कि किस चीज से लड़ना है और किसे नजरअंदाज करना है।
• अगर यह सिस्टम बिगड़ जाए, तो शरीर एलर्जी या ऑटोइम्यून बीमारियों से ग्रसित हो सकता है।

3. गट लाइनिंग और लीकी गट सिंड्रोम

• अगर गट की परत कमजोर हो जाए, तो लीकी गट की स्थिति पैदा होती है।
• इससे अनडाइजेस्टेड फूड पार्टिकल्स और टॉक्सिन्स खून में चले जाते हैं, जिससे इम्यून सिस्टम ओवर-रिएक्ट करता है और सूजन (Inflammation) बढ़ती है।

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When Gut Health Fails

एक स्वस्थ गट के पीछे छुपे कारण

जब हम गट हेल्थ की बात करते हैं, तो सिर्फ खाना-पीना या पाचन की प्रक्रिया को ही नहीं देखना चाहिए। इसके पीछे कुछ ऐसे कारण भी होते हैं जो हमारे नियंत्रण में नहीं होते – जैसे जेनेटिक्स (आनुवांशिकता), हमारा बचपन, और हमारा वातावरण।

1. जेनेटिक्स (आनुवांशिक असर)

आपके शरीर की मूल संरचना, इम्यून सिस्टम की प्रतिक्रिया और आंतों की संवेदनशीलता काफी हद तक आपके जीन पर निर्भर करती है। कुछ लोग जन्म से ही कुछ खास बैक्टीरिया को naturally carry करते हैं, जिससे उनकी गट हेल्थ मजबूत होती है।

2. पर्यावरण और जीवनशैली

आप किस वातावरण में बड़े हुए – ग्रामीण, शहरी, प्रदूषित या स्वच्छ, ये भी गट माइक्रोबायोम को प्रभावित करता है। साफ-सफाई में पले-बढ़े बच्चों में एलर्जी ज़्यादा पाई जाती है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम “प्रशिक्षित” नहीं हो पाता।

3. जन्म की प्रक्रिया (C-सेक्शन या नॉर्मल डिलीवरी)

नॉर्मल डिलीवरी के दौरान शिशु को मां के जन्म मार्ग (birth canal) से अच्छे बैक्टीरिया मिलते हैं। वहीं, सी-सेक्शन से जन्मे बच्चों को यह लाभ नहीं मिल पाता, जिससे उनकी गट हेल्थ की शुरुआत थोड़ी कमजोर हो सकती है।

4. शुरुआती जीवन और स्तनपान

मां का दूध बच्चे को लाइव प्रोबायोटिक्स और एंटीबॉडीज़ देता है, जो आंतों को मजबूत बनाते हैं। जिन बच्चों को शुरू से ही फॉर्मूला फीड दिया जाता है, उनमें गट हेल्थ का विकास धीमा हो सकता है।

तो समझिए: गट हेल्थ सिर्फ आज की डाइट पर नहीं, बचपन की नींव पर भी टिकी है।

हम भविष्य में कितना स्वस्थ रहेंगे, इसका बीज हमारे जन्म के समय ही बो दिया जाता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि मां और बच्चे की शुरुआती देखभाल में गट हेल्थ को भी महत्व दिया जाए।

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गट हेल्थ सुधारकर इम्युनिटी को कैसे मजबूत करें?

1. प्रोबायोटिक फूड्स: दही, किमची, कांजी, अचार जैसे फूड्स आँतों में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाते हैं।
2. प्रीबायोटिक फूड्स: फाइबर युक्त फूड्स (केला, लहसुन, प्याज, ओट्स) ये अच्छे बैक्टीरिया के लिए खाना होते हैं।
3. प्रोसेस्ड फूड से दूरी: फास्ट फूड, ज्यादा चीनी और रिफाइंड तेल गट फ्लोरा को नुकसान पहुंचाते हैं।
4. नींद और तनाव का प्रबंधन: कम नींद और ज्यादा तनाव गट माइक्रोबायोम को बिगाड़ते हैं।
5. एंटीबायोटिक्स का जरूरत से ज्यादा प्रयोग : ये अच्छे बैक्टीरिया को भी खत्म कर देते हैं।

6. खाना चबा-चबाकर खाएं: एक ही समय पर खाना खाएं, खाने के बाद हल्का वॉक करें

https://www.bbc.com/hindi/articles/c071ld01rd5o

गट हेल्थ से जुड़े मिथक

मिथकसच्चाई
सभी बैक्टीरिया खराब होते हैंअच्छे बैक्टीरिया भी जरूरी हैं
सिर्फ दही खाने से गट हेल्थ सुधरती हैकई तरह के फूड जरूरी हैं
पेट साफ होना ही गट हेल्थ हैऔर भी लक्षण जरूरी हैं

याद रखें:
पेट स्वस्थ तो शरीर स्वस्थ! संतुलित आहार, एक्सरसाइज, और तनाव कम करके आप अपने गट को हेल्दी रख सकते हैं।

निष्कर्ष:

आपकी आंतें सिर्फ भोजन को पचाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे आपके शरीर के सुरक्षाकर्मी हैं। एक हेल्दी गट मतलब-  मजबूत इम्यूनिटी, कम एलर्जी, बेहतर ऊर्जा और कम बीमारियाँ, इसलिए “गट को ठीक करो, शरीर खुद ठीक हो जाएगा” अब सिर्फ कहावत नहीं, बल्कि विज्ञान है।

गट हेल्थ का सीधा संबंध आपके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से है। यदि आप पेट की समस्याओं को नजरअंदाज करते हैं, तो यह आगे चलकर बड़े रोगों का कारण बन सकता है। इसलिए संतुलित आहार, स्वस्थ जीवनशैली और दिमागी शांति से आप अपनी आंतों को भी स्वस्थ रख सकते हैं।

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