हम घंटों सोशल मीडिया चलाते हैं… लेकिन बंद करते ही मन खाली क्यों लगने लगता है?

हर लाइक और नोटिफिकेशन दिमाग में खुशी का केमिकल छोड़ता है।

ये खुशी असली नहीं होती, इसलिए जल्दी खत्म हो जाती है।

दिमाग और चाहता है…और हम फिर से phone स्क्रॉल करने लगते हैं।

दूसरों की “परफेक्ट ज़िंदगी” देखकर हम अपनी ज़िंदगी को छोटा समझने लगते हैं।

ऑनलाइन हम जुड़े रहते हैं…लेकिन असल ज़िंदगी में अकेले होते जाते हैं।

लगातार कंटेंट देखने से दिमाग थककर सुन्न हो जाता है।

सोशल मीडिया बुरा नहीं है…लेकिन उसकी लत हमें अंदर से खाली कर देती है।